यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच छात्रों का वापस आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। रविवार को यूक्रेन से 24 बच्चे पटना एयरपोर्ट पहुंचे। इनमें मुजफ्फरपुर, खगड़िया, सीतामढ़ी, मधेपुरा समेत कई जिलों के बच्चे शामिल थे। पटना आने के बाद सभी बच्चे अपने-अपने घर की ओर निकल पड़े। उनके घर पहुंचने पर परिवार के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। वहीं, छात्रों ने घर पहुंचने पर भास्कर से बातचीत के क्रम में अपनी आपबीती सुनाई।
मुजफ्फरपुर की सना ने बोली- दो वक्त का खाना भी नहीं मिल पा रहा था
ऐसे में जब मुजफ्फरपुर के रिटायर्ड जिला कृषि पदाधिकारी मो.अलाउद्दीन की बेटी सना तस्कीन अपने घर पहुंची तो उसके घर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सना शहर के ब्रह्मपुरा के हजरत कॉलोनी की रहने वाली है। उसके घर पहुंचते ही माता-पिता ने मोहल्ला में मिठाई बांटकर खुशियां मनाई। वहीं, दोपहर बाद से सना के घर पर रिश्तेदारों और मोहल्ला के लोगों का तांता लगा रहा।
इधर, सना ने बताया कि वह बीते 10 दिनों से चैन की नींद नहीं सो पाई है। वहां दो वक्त का खाना भी सही से नहीं मिल पा रहा था। हम लोग रूस व यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ने के साथ ही भारतीय दूतावास के संपर्क में थी। दूतावास के निर्देश पर ही उनकी गतिविधि हो रही थी।


मुजफ्फरपुर के रिटायर्ड जिला कृषि पदाधिकारी मो.अलाउद्दीन की बेटी सना तस्कीन रविवार को अपने घर पहुंची।
उन्होंने बताया कि सना अपने दोस्तों के साथ रोमानिया बॉर्डर के करीब चर्णविस्टी शहर में थी। इससे बॉर्डर तक पहुंचने में परेशानी नहीं हुई। हालांकि, इमिग्रेशन के दौरान थोड़ी विलंब हुई और फिर बॉर्डर से एयरपोर्ट जाने में करीब सात घंटे का सफर तय करना पड़ा। इस दौरान भारतीय दूतावास ने हर संभव मदद की। इसकी वजह से हम भारत लौट से। सना ने बताया कि अब स्थिति बिगड़ रही है। बॉर्डर पर लगातार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार शाम तक तीन हजार बच्चे पहुंच चुके थे। इससे कई प्रकार की कमियां होनी शुरू हो गयी है।
भारतीय दूतावास की मदद से बची जान
इसके अलावा यूक्रेन युद्ध में फंसे मधेपुरा का मेडिकल छात्र सतीश कुमार शाहिल आज देर शाम अपने घर सकुशल पहुंच गया। शाहिल ने बताया कि युद्ध के बाद उन्हें कई तरह की परेशानी से गुजरना पड़ा। गैस कनेक्शन ठप था, बिजली पानी सब कुछ बंद था। जिंदगी अंधेरे में बीत रही थी। लोग बंकरों में रह रहे थे। हमे सुरक्षित घर तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते है।
इधर, सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड स्थित शिवनगर बेला गांव निवासी मुकेश चौधरी के पुत्र राहुल कुमार रविवार के देर शाम अपने घर पहुंचा। राहुल वर्ष 2018 में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए एक कुरान के चेनीवक्सी गया था। जहां कोवियन स्टेट ऑफ मेडिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। 2018 से ही राहुल अब तक घर नहीं आया था।

यूक्रेन से सीतामढ़ी पहुंचा राहुल।
इस बीच गत 22 फरवरी को हॉस्टल में बैठे राहुल एवं अन्य साथियों के मोबाइल पर सतर्क हो जाने की मैसेज आई। जिसके बाद हॉस्टल संचालक के द्वारा सभी छात्रों को बंकर में ले जाया गया। राहुल ने बताया कि युद्ध शुरू होने की स्थिति में जहां रह रहा था उससे डेढ़ सौ किलोमीटर दूर बम के धमाके हो रहे थे। जिससे हॉस्टल में रह रहे सभी छात्र डरे सहमे हुए थे। खाने-पीने से लेकर सभी तरह की दुकानें बंद कर दी गई थी। ऐसे में खाने पीने के लिए साथ में लाए गए फास्ट फूड का सहारा बना रहा।
इसी बीच छात्रों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। वहीं, दूतावास के द्वारा मैसेज दिया गया कि भारत सरकार से निर्देश मिलने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद दूतावास की ओर से ऑनलाइन फॉर्म भी भरवाया गया। फिर 24 फरवरी को दूतावास की ओर से मैसेज मिला कि आप लोग तैयार रहें बस से रोमानिया बॉर्डर तक लाने की तैयारी की जा रही है। 24 फरवरी कि शाम बस से रोमानिया बॉर्डर लाया गया। वहीं, तिरंगा के साथ भारतीय सैनिकों की अगुवाई में 240 भारतीय को रोमानिया बॉर्डर तक लाया गया। इसके बाद वहां से एयर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली लाने की तैयारी की गई।

खगड़िया की नाज फातमा ने बताया कि यूक्रेन में भारतीय छात्रों को रोका जा रहा।
यूक्रेन में भारतीय छात्रों को रोका जा रहा
इधर, यूक्रेन की राजधानी कीव से वापस लौटी खगड़िया की नाज फातमा ने बताया कि हम लोगों को 16 जनवरी को अलर्ट मिल गया था कि वहां हमला हो सकता है। इसके बाद उन्होंने इंडियन एम्बेसी से संपर्क किया। लेकिन मदद नहीं मिली। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में भारतीय छात्रों को रोका जा रहा है, ताकि घायलों के इलाज में वहां की सरकार को मदद मिले।



Leave a Reply