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यूक्रेन में बिहार के छात्रों को खाने के पड़े लाले, पीने का पानी भी मिलना मुश्किल

यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से वहां फंसे छात्रों का हाल बेहाल हो गया है। बिहार के कई छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। इसमें मुजफ्फरपुर के भी तीन छात्र हैं। शहर के बीबीगंज के रहने वाले मेडिकल छात्र आशीष चंद्रा ने बताया कि अब यहां पर खाने के लाले पड़ रहे हैं। पीने का पानी बहुत मुश्किल से मिल रहा है। जिस पानी की कीमत कल तक 30 रुपए प्रति लीटर थी। वह आज 125-130 रुपए लीटर हो गया है। इतना पैसा देने के बावजूद भी पानी बहुत मुश्किल से मिल रहा है। राशन मिलना बंद हो गया है। यूक्रेन में रह रहे बिहार और उत्तर बिहार के मेडिकल छात्रों की परेशानी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सभी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल, एयरपोर्ट, दूतावास में फंसे हैं। फिलहाल स्टॉक में रखे राशन से पेट भर रहे हैं। दवाएं मिलनी भी बंद हो गई हैं। दवा दुकानें भी बंद हैं। ATM में रुपए नहीं हैं। हालात बद से बदतर हो रही है। सभी खौफ व दहशत के बीच शरण लिए हैं। यूक्रेन में रह रहे सकरा के सुमित ने बताया कि एक जगह से दूसरे जगह जाने में दिक्कत है। कभी भी बमबारी हो सकती है। बम उन पर गिर सकता है। इससे वे लोग अपने स्टॉक को ही बचा-बचाकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

इंटरनेट सेवा भी प्रभावित
आशीष ने बताया कि इंटरनेट सेवा भी प्रभावित हुई है। पहले की तरह संचालित नहीं हो रहा है। काफी डाउन है। टमाटर से लेकर आलू तक के दाम बढ़ गए हैं। दाम कई गुणा बढ़ा है। ब्रेड और दूध नहीं मिल रहा है। समस्तीपुर जिले के पूसा के राकेश कुमार ने बताया कि ओ-ब्लास्ट में चावल तक नहीं मिल रहा है। घर के बाहर सिर्फ मौत मंडरा रही है। सिर के ऊपर से मिसाइल गुजर रहा है। हम लोग भगवान का नाम लेकर रह रहें है। सड़क पर सिर्फ सैनिक और आकाश में सिर्फ धुआं और आग की लपट दिख रही है। कलेजा दहल जा रहा है। घर वाले परेशान हैं।

हॉस्टल में फंसी है अमृता
मुजफ्फरपुर की अमृता ने बताया कि वे एक हॉस्टल में फंसी हुई है। 26 फरवरी को फ्लाइट थी, जो रद्द हो गई है। अमृता ने बताया कि सड़क मार्ग से सुरक्षित स्थानों पर जाने का प्रयास किया जा रहा है। बमबारी की वजह से जाना संभव नहीं हो पा रहा है। एयरपोर्ट और अन्य जगह जमीन पर सामान लेकर सोना पड़ रहा है। लड़कियों को परेशानी अधिक हो रही है। हालात डरावने हैं।

भगवान से कर रहे दुआ
मुजफ्फरपुर के बीबीगंज निवासी रियल स्टेट के कारोबारी अमरेश कुमार सिन्हा, सकरा पिलखी के हार्डवेयर कारोबारी दिलीप चौधरी, अहियापुर के रिटायर रेलकर्मी रणजीत कुमार साह ने बताया कि वे लोग अपने-अपने बच्चों के संपर्क में है वहांं बच्चों की स्थिति बहुत खराब है। कभी भी उनके साथ अनहोनी हो सकती है। वे सुरक्षित नहीं हैं। सरकार उनकी मदद करें। वर्तमान में भगवान ही एक सहारा है। वहीं उनके बच्चों की रक्षा करेंगे। सरकार से अपील करते है कि सभी को जल्द यूक्रेन से निकालकर कही भी सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करें।

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