
याद दिला दें कि बाथम ने बीती गुरुवार रात बेटी के जन्मदिन के बहाने 25 बच्चों को आमंत्रित कर उन्हें बंदी बना लिया था। बाद में उसी रात पुलिस ऑ’परेशन में बाथम मा’रा गया था। गु’स्साई भीड़ ने सुभाष बाथम की पत्नी रूबी को पी:ट-पी’ट कर मौ’त के घाट उतार दिया था। ऑप’रेशन खत्म होने केबाद पुलिस ने बाथम के घर से उसकी बेटी को बचाया था।काहेका बिटवा, हमका मा:रत-पी’टत रहा, म’र गवा होई-भागो इहां से। यह शब्द थे पुलिस एनकाउंटर में मा’रे गए बद’माश सुभाष बाथम की बूढ़ी मां के। मैनपुरी के अहकरियापुर गांव में रहने वाले सुभाष की मां सुरजादेवी को बेटे के अंतिम संस्कार के लिए लेने पहुंचे मोहम्मदाबाद के दरोगा रामसरन मां का आ’क्रोश सुन दं’ग रह गई। लाख समझाने के बाद भी वह बेटे का श’व देखने तक को तैयार न हुई। थक हारकर पुलिस को लौटना पड़ा।

चलने-फिरने में ला’चार, पैरासिसिस रो’ग से पी’ड़ित सुरजादेवी ने कहा, हमका गांव वाले बताइन कि सुभषवा गांवन के बच्चन का कै’द कै लीस है। बताओ नान-नान बच्चन का भूखे-प्यासे धरा रहा। कौनन की सुनिस तक नाही। हमऊ का बहुत मार’त रहा। काहे का बिटवा। बूढ़ी मां के ये शब्द सुनकर गांव वाले तक हैरा’न हो गए। रविवार को उसे मानाने पहुंचे दरोगा ने गांव वालों और अन्य रिश्तेदारों से भी मां को माने के लिए कहा, लेकिन सभी ने भी हाथ खड़े कर दिया। लोगों ने कहा, एेसे बेटे का क्या फायदा जो मां-बाप की सेवा तक न कर सके। अंत में दल बल के साथ पहुंचे दरोगा रामसन ने जानकारी इंस्पेक्टर को दी और लौट आए।



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