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पटना: आज से कचरा नहीं उठाएंगे सफाईकर्मी, जानें कारण…

शहर की सफाई व्यवस्था सोमवार को ठप रह सकती है। नगर निगम के सभी दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मी सोमवार से ह’ड़ताल पर रहेंगे। दैनिक कर्मियों ने नगर विकास विभाग के उस आदेश को वापस लेने की मांग की है, जिसमें एक फरवरी से सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को कार्य से हटा दिया गया है। पटना नगर निगम में दैनिक वेतन भोगी मजदूर करीब 4500 हैं। वहीं आउटसोर्सिंग पर करीब 1500 मजदूर सफाई का कार्य करते हैं। ऐसे में सभी संगठनों ने विभागीय आदेश को वापस लेने की मांग की है। पटना नगर निगम चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ ने रविवार को आम सभा कर कहा कि जबतक मांगें मानी नहीं जाती है, तबतक हड़’ताल जारी रहेगी। संघ के महासचिव नंद किशोर दास ने बताया कि हड़ताल में निगम के स्थायी सफाई कर्मी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को सभी अंचल कार्यालयों का घे’राव किया जाएगा। मौर्यालोक परिसर स्थित निगम मुख्यालय पर प्रद’र्शन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि रविवार को भी सफाईकर्मियों ने कार्य का ब’हिष्कार किया। ह’ड़ताल पर जाने से शहर की सफाई का काम पूरी तरह से बा’धित होगा। इसके लिए नगर निगम प्रशासन जिम्मेवार होगा। राज्य भर के नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायतों के हजारों मजदूरों ने एकजुट होकर आंदो’लन शुरू कर दिया है। दैनिक कर्मियों का कहना है कि विभागीय मंत्री ने 10 वर्षों से कार्यरत मजदूरों को स्थायी करने का आदेश दिया था। वहीं अब विभाग के सचिव ने दैनिक मजदूरों को हटाने के आदेश दिए हैं। ऐसे में दैनिक मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति बन जाएगी। संघ के अध्यक्ष बिंदेश्वरी सिंह, डॉ. अशोक प्रभाकर आदि शामिल थे। वहीं, रविवार को बिहार लोकल बॉडिज फेडरेशन की बैठक की गई। बैठक की अध्यक्षता शिवबचन शर्मा ने की, जिसमें निर्णय लिया गया कि 18 फरवरी को मुख्यमंत्री के समक्ष राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया जाएगा।

लोकायुक्त के निर्णय पर मेयर ने जताया अ’फसोस
महापौर सीता साहू ने लोकायुक्त के निर्णय को लागू करने पर अफसोस जताया है। उन्होंने आरो’प लगाया कि लोकायुक्त कोर्ट में कई तथ्यों को छु’पाकर गुम’राह करने का प्रयास किया गया। इस संबंध में निगम अपना पक्ष रखेगा। निगम में दस सालों से अधिक समय से काम कर रहे दैनिक कर्मियों की सेवा को नियमित करने की भी प्रक्रिया चल रही है, जो कर्मचारियों का अधिकार है। जून 2018 में नगर विकास विभागके पत्र के आधार पर निगम क्षेत्र में आउटसोर्सिंग एजेंसियों से कर्मचारी से काम लिया जा रहा है। बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा में यह स्पष्ट है कि निगम व निकाय में कोटि ग और कोटि घ की नियुक्ति मुख्य नगर पालिका पदाधिकारी शक्ति प्रदत्त सशक्त स्थायी समिति से अनुमोदन प्राप्त करके कर सकते हैं। सरकार केवल कोटि क व कोटि ख के पदों पर नियुक्ति कर सकती है।

स्वायत्तता छीनने का प्रयास : मेयर
मेयर सीता साहू ने निगम की स्वायत्तता छीनने का आरोप भी लगाया। उन्होंने सवाल किया कि कैसे बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 में दिए गए प्रावधानों को एक-एक कर संकल्प के माध्यम से समाप्त किया जा रहा है। यह नगर निगम और नगर निकाय के स्वायत्तता को छीनने का कुत्सित प्रयास है। मेयर ने कहा कि किसी भी अधिनियम को नियम बनाकर समाप्त नहीं किया जा सकता है। यह असंवैधानिक होगा।

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