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जानिए, बिहार के भव्य विराट रामायण मंदिर को, 270 फीट है ऊंचाई, सबसे बड़ा 33 फीट का शिवलिंग भी बनेगा

पूर्वी चंपारण के चकिया-केसरिया के पास जानकीपुर में ‘विराट रामायण मंदिर’ बन रहा है। यह बिहार का सबसे भव्य मंदिर होने के साथ ही देश के सबसे बड़े मंदिरों में एक होगा। मंदिर की खास बात इसकी ऊंचाई है। यह 270 फीट ऊंचा, 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा।

वैशाली से 60 और पटना से 120 KM दूर इस भव्य मंदिर को बनाने का कॉन्सेप्ट पटना के महावीर मंदिर के सचिव आचार्य किशोर कुणाल का है। किशोर कुणाल पूर्व IPS हैं। उन्होंने महावीर मंदिर के साथ ही पटना में महावीर कैंसर संस्थान और महावीर आरोग्य संस्थान की स्थापना भी की है।

पटना के महावीर मंदिर में रखा 'विराट रामायण मंदिर' का डिजाइन।

पटना के महावीर मंदिर में रखा ‘विराट रामायण मंदिर’ का डिजाइन।

मंदिर बनाने का मकसद क्या है और चंपारण में ही क्यों?

भास्कर से बातचीत में आचार्य किशोर कुणाल ने बताया, ‘महावीर मंदिर तो भव्य है, लेकिन इसमें हनुमान जी बहुत कम स्थान में हैं। इसलिए सबकी इच्छा हुई कि वो विराट रूप धारण करें। इसी के अनुकूल हमलोग ‘विराट रामायण मंदिर’ बना रहे हैं।’

उन्होंने बताया, ‘मंदिर बनाने के लिए पहले वैशाली में जमीन देखी गई थी, लेकिन वो कम पड़ गई। फिर सीतामढ़ी के पुनौरा धाम के पास जमीन मिली। पुनौरा धाम को ही माता जानकी का जन्मस्थान माना जाता है, लेकिन वहां पहले से ईंट भठ्ठा चल रहा था। माता जानकी का भव्य मंदिर बनाने के नाम पर भी कोई जमीन देने को तैयार नहीं हुआ।

इसके बाद हमने चंपारण में जमीन देखी। इस जमीन के पास से अयोध्या-जनकपुर (नेपाल) पथ गुजरने वाला है। एक मान्यता यह भी है कि जब भगवान राम की बारात लौट रही थी, तब यात्रा की दूसरी रात उन लोगों ने यहीं बिताई थी। मंदिर तैयार होने के बाद जो लोग भी अयोध्या से जनकपुर आएंगे-जाएंगे, उन्हें रास्ते में यह मंदिर बिल्कुल सामने दिखेगा।’ बता दें, फिलहाल ट्रस्ट को करीब 40 एकड़ जमीन मिल गई है। वहां 100 एकड़ जमीन उपलब्ध है।

आचार्य किशोर कुणाल।

आचार्य किशोर कुणाल।

मंदिर की और ख़ासियत क्या-क्या हैं?

इस मंदिर को ‘टेंपल ऑफ टावर्स’ के नाम से जाना जाएगा। इसके आसपास 13 मंदिर बनाए जा रहे हैं और सब ऊंचे शिखर वाले मंदिर हैं। बगल के जो 4 मंदिर हैं, वो 180 फीट ऊंचे हैं। साथ ही मंदिर में दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की स्थापना की जा रही है, जो 33 फीट ऊंचा है। इसकी गोलाई भी 33 फीट ही है। इसमें 3 सीढ़ियां और 4 लिफ्ट होंगे, जिससे भक्त ऊपर जाकर आराम से जल चढ़ा सकेंगे।

पत्थरों की कमी, इसलिए कंक्रीट से बना रहे मंदिर

किशोर कुणाल के अनुसार, इस मंदिर को कंक्रीट से बनाया जाएगा, क्योंकि बिहार में पत्थरों की बहुत कमी है। आसपास जो भी पत्थरों वाली जगह हैं, सब अयोध्या के राम मंदिर को दी जा रही हैं। मंदिर को इस तरह से बनाया जा रहा है कि यह 300 से 400 सालों तक रहे। इसमें कंक्रीट के साथ ट्फेन ग्लास का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे मंदिर देखने में बहुत खूबसूरत लगेगा।

ऐसा होगा मंदिर।

ऐसा होगा मंदिर।

मंदिर बनने में कितना समय लगेगा?

इस साल मार्च के आखिर तक मंदिर बनाने का काम शुरू हो जाएगा। अगले ढाई साल में स्ट्रक्चर खड़ा हो जाएगा और फिर अगले ढाई साल इसकी फीनिशिंग में लगेंगे। फीनिशिंग के लिए दक्षिण भारत के कलाकारों को बुलाया जाएगा। मंदिर बनाने के लिए महावीर मंदिर ट्रस्ट के पास इतने रुपए हैं कि फाउंडेशन से लेकर शिखर तक का स्ट्रक्चर तैयार हो जाएगा। उसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो ट्रस्ट बिहार के लोगों से मदद लेगा।

मंदिर निर्माण से जुड़े CPWD के पूर्व DG

‘विराट रामायण मंदिर’ निर्माण से अब केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पूर्व DG विनीत कुमार जायसवाल भी जुड़ गए हैं। हाल में रिटायर होने से पहले वो नए संसद भवन निर्माण से जुड़े थे। उनके निर्देश पर मंदिर के स्ट्रक्चरल डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। उनके साथ ‘पावरग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया’ के पूर्व CMD आरपी सिंह भी मंदिर निर्माण समिति के सदस्य हैं।

मंदिर का नक्शा।

मंदिर का नक्शा।

कंबोडिया के राजदूत ने लगाई थी रोक

बताया जाता है कि पहले मंदिर विश्व प्रसिद्ध कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की शैली में बनना था। इसकी जैसे ही चर्चा फैली कंबोडिया के राजदूत ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर नक्शा को देखा था। उन्होंने अंकोरवाट मंदिर को वहां के लोगों की आस्था का प्रतीक बताकर उसी तर्ज पर मंदिर बनाने पर रोक लगाने की रिपोर्ट अपनी सरकार को दी थी। इसके बाद उसके नक्शा में परिवर्तन कर दिया गया। अब अड़चनें दूर हो चुकी हैं।

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