24 जनवरी से शुरू हुए छात्र आंदोलन की वजह से ही 28 जनवरी को बिहार बंद का ऐलान किया गया था। छात्रों के नाम पर इस बंद को कई राजनीतिक दलों ने अपना समर्थन दे दिया। जिसके बाद 27 जनवरी की रात खान सर ने अपना एक वीडियो जारी किया। जिसमें उन्होंने छात्रों से इस बिहार बंद में शामिल नहीं होने की अपील की थी। खान सर के इस वीडियो को बड़ा असर शुक्रवार को देखने को भी मिला। बिहार बंद बेअसर साबित हुआ। बंद के बीच हम यह जानने के लिए भीखना पहाड़ी इलाके के एक हॉस्टल में पहुंचे कि बंद के दौरान छात्र कर क्या रहे हैं? वो क्यों बंद में शामिल नहीं हुए? उनके मन में क्या चल रहा है? इन सवालों के आधार पर कुछ छात्रों से बात की गई। छात्र खान सर को अपना अभिभावक मानते हैं। बढ़ती बेरोजगारी की वजह से छात्र केंद्र सरकार को अपना सबसे बड़ा विलेन मानने लगे हैं।
खान सर ने मना किया, इसलिए शामिल नहीं हुए
छात्र मनोरंजन कुमार से जब यह सवाल पूछा गया कि बिहार बंद कितना जायज था? इस सवाल पर इस छात्र ने कहा कि खान सर ने पहले ही मना कर दिया था कि बंद में छात्रों को शामिल नहीं होना है। इसलिए हमलोग उसमें शामिल नहीं हुए। अपने हॉस्टल में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। बंद तो जाप नेता पप्पू यादव और दूसरे राजनीतिक पार्टियों ने बुलाया था। रेलवे के फैसले सही तरीके से विश्वास नहीं हो पा रहा है। स्टूडेंट्स की संख्या काफी है। नरेंद्र मोदी की सरकार में बेरोजगारी बढ़ गई है। रेलवे की वेकैंसी बहुत कम आती है। युवाओं को पूरी तरह से बेरोजगार बना दिया गया है। पहले की सरकार में ऐसा नहीं था।

वर्तमान सरकार ने तोड़ दिया है दिल
छात्र राजेश कुमार ने कहा कि वेकैंसी आती है तो कोई उसका रूल रेगुलेशन नहीं है। कोई एग्जाम लेने वाला नहीं है। हम लोग किसान परिवार से आते हैं। ग्रुप डी और लेवल 1 के नौकरी की तैयारी करते हैं। वर्तमान सरकार ने दिल तोड़ दिया है। भूखे रह कर और रात-रात भर जाग कर हम तैयारी करते हैं। राज्यों में अपना चुनाव करा रहे हैं। एक-दो दिन में वोटों की गिनती कर जब चुनावी रिजल्ट आ सकता है तो एग्जाम के रिजल्ट में देर क्यों होती है? सवाल सरकार की मंशा पर उठ रहे हैं। कोरोना काल में जब चुनाव हो सकता है तो एग्जाम क्यों नहीं सकता है? शर्म तो रेल मंत्री को आना चाहिए। करोड़ों युवा बेरोजगार हैं। हमारा इस्तेमाल किया जा रहा है। गरीब मर रहे हैं।
उपद्रवी तत्वों ने मौके का उठाया फायदा
छात्र धीरज जायसवाल NTPC की तैयारी कर रहे हैं। इन्होंने इस बार एग्जाम भी दिया था। छात्र आंदोलन में शामिल थे। धीरज के अनुसार हम लोगों ने शांति से प्रोटेस्ट किया। हम अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। हमारी बात पहुंच गई है। कुछ मुद्दों पर चल भी रही है। 26 जनवरी के एक दिन पहले खान सर का वीडियो आया था। उन्होंने कहा था कि गणतंत्र दिवस के दिन कुछ नहीं होना चाहिए। यह राष्ट्रीय पर्व है। उनकी बातों को हमने माना भी। उस दिन कोई प्रोटेस्ट नहीं किया। खान सर हमारे अभिभावक हैं। खान सर ने दंगा करने, ट्रेन फूंकने के लिए कभी भी प्रयोग नहीं किया। उपद्रवी तत्व हैं जो छात्रों के आंदोलन में घुस गए हैं और मौके का फायदा उठा रहे हैं। स्टूडेंट्स शांति तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे थे।
रेलवे ने हमारी मांगों पर नोटिस जारी किया
छात्र आभास कुमार ने कहा कि बिहार बंद में हम लोग जाकर क्या करेंगे? बिहार बंद बुलाना उचित नहीं था। रेलवे का एग्जाम दिए थे हम। रेलवे ने हमारी मांगों पर नोटिस जारी किया है। रेलवे ने कहा है कि 4 मार्च तक सभी छात्रों से राय मांगी गई है। हम उनकी मांगों के अनुरूप ही आगे फैसला लेंगे।



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