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मगरमच्छ से भाई की जान बचाने वाले बेतिया के धीरज ने पीएम मोदी से कहा- फौजी बनकर देश की सेवा करूंगा

बेतिया के योगापट्टी प्रखंड की चौमुखा पंचायत के वार्ड नंबर 6 के निवासी राजबली यादव के बेटे धीरज कुमार (14 वर्ष) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2022 से सम्मानित किया जा रहा है। बता दें कि 2 सितंबर 2020 को धीरज ने अपने साहस का परिचय देते हुए एक मगरमच्छ से लड़कर अपने छोटे भाई की जान बचाई थी। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धीरज से बात की।

पीएम मोदी ने धीरज कुमार से कहा कि आपके साथ जो घटना घटी, उसका कैसे सामना किया। धीरज ने जवाब देते हुए कहा कि उस वक्त मेरी उम्र चौदह वर्ष थी। मैं अपने भाई के साथ भैंस धोने गए थे। तभी मगरमच्छ ने मेरे भाई पर हमला कर दिया। मैं घायल हो गया था पर भाई को घर ले आया। वहां से मैं अपने भाई को सरकारी अस्पताल लेकर गया। पीएम मोदी ने फिर पूछा कि क्या आपका भाई उस घटना को याद करता है? धीरज ने कहा कि उसे डर लगता है, वो अब नदी के आस-पास कभी नहीं जाता है। 

पीएम मोदी ने धीरज से फिर सवाल किया कि मगरमच्छ इतना बड़ा दिखा तो डर नहीं लगा? खून भी दिखाई दे रहा होगा। धीरज ने बताया कि उस समय मुझे केवल मेरा भाई दिख रहा था और कुछ नहीं। पीएम मोदी ने पूछा कि तुम्हारा पसंदीदा कोई सुपरहीरो है क्या? धीरज ने कहा कि सुपरहीरो! पीएम मोदी ने कहा कि आपने अपने भाई को बचाया, ऐसा साहस और संयम दिखाया और बुद्धि भी दिखाई। आप जैसे बालक ऐसी घटनाओं में जब अपने भीतर की सारी शक्ति को दिखाते हुए जिंदगी बताते हैं तो प्रेरक बना जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे पूछा की बड़े होकर क्या बनोगे। धीरज ने कहा कि हम फौजी बनकर देश की सेवा करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि धीरज के विचार भी देशभक्ति के लिए भी जुनून है।

बता दें कि योगापट्टी प्रखंड में सितंबर 2020 को धीरज कुमार और उसका छोटा भाई नीरज कुमार भैंस चराने के लिए दियारे में गए थे। इसी दौरान नारायणी गंडक नदी के एक सोती में दोनों भाई भैंस को नहलाने लगे। इसी बीच छोटे भाई नीरज पर मगरमच्छ ने हमला बोल दिया। नीरज पर हमला होते देख धीरज मगरमच्छ से जा भिड़ा। भैंस चराने के लिए साथ में ले गए डंडे से वार करता रहा। इसके बाद मगरमच्छ के चंगुल से धीरज ने अपने छोटे भाई नीरज को छुड़ा लिया। इस दौरान दोनों भाई गंभीर रूप में घायल भी हो गए थे। दोनों भाइयों का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बेतिया में सात दिनों तक इलाज भी चला था। धीरज के पिता राजबली यादव किसान हैं और मजदूरी का भी काम करते हैं। वहीं धीरज की मां घर के कामों के बाद पिता के काम में भी हाथ बंटाती हैं। दोनों बच्चे धीरज और नीरज गांव के ही सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के साथ पिता के काम में हाथ बंटाते हैं।

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