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क्या ओमिक्रॉन वेरिएंट से होगा कोरोना महामारी का अंत?

नई दिल्ली: दुनियाभर में ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) के कारण कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) के मामले तेजी से बढ़े हैं. कई देशों में इस वेरिएंट करोड़ों लोगों को संक्रमित कर दिया. पिछले 2 महीनों में ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर कई स्टडी हुई हैं. जिनमें इस वेरिएंट की संक्रमण की दर और गंभीरता का अध्ययन किया गया है. इन तमाम स्टडी में यह पाया गया कि ओमिक्रॉन कोविड-19 (Covid-19) के पिछले अन्य वेरिएंट्स की तुलना में अति संक्रामक है लेकिन हल्के लक्षणों के कारण यह फेफड़ों में गंभीर बीमारी का कारण नहीं बना है. इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक तर्क हैं.विज्ञापन

दुनिया के कई देशों से संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने की दर से जुड़े डाटा से इस बात की पुष्टि हुई है कि इस वेरिएंट का इंफेक्शन रेट हाई है लेकिन इसकी तुलना में हॉस्पिटल में एडमिट होने वाले मरीजों की संख्या बेहद कम है. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट कोरोना महामारी के अंत की शुरुआत साबित हो सकता है. 5 ग्लोबल स्टडी में इस सवाल का जवाब है-

इंटरनेशनल जरनल ऑफ इंफेक्शियस डिसीज में 28 दिसंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में यह बताया गया कि साउथ अफ्रीका में किए गए अध्ययन यह पता चला है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट कोविड-19 संक्रमण से जुड़े कम गंभीर मामलों का कारण बना. इस वेरिएंट की पहचान पहली बार 9 नवंबर 2021 को तशवाने शहर में हुई थी जो कि साउथ अफ्रीका के ग्वाटेंग प्रांत में स्थित है. इस शहर में ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण कोरोना की चौथी लहर आई थी लेकिन गंभीर केसों की संख्या पिछली लहर की तुलना में बहुत कम थी.

डेल्टा मुकाबले ओमिक्रॉन वेरिएंट कम घातक

इस विषय को लेकर 11 जनवरी को साइंटिफिक जरनल मेड्रिक्सवी में सबसे लेटेस्ट स्टडी प्रकाशित हुई है. इसमें यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के डायरेक्टर, डॉ रोसले वालेन्सकी ने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट, डेल्टा समेत पिछले अन्य सभी वेरिएंट्स की तुलना में कम घातक है. इस रिसर्च का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि साउथ कैलिफोर्निया में ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित 52,297 मरीजों और डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित 16,982 मरीजों पर यह अध्ययन किया गया. डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित 53 प्रतिशत मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम हुआ और 74 फीसदी मामलों में मरीज को आईसीयू में भर्ती करने की नौबत नहीं आई जबकि इस वेरिएंट से होने वाली मौत का जोखिम 91 फीसदी तक घटा.

संक्रमण के मामले में ओमिक्रॉन 70 गुना तेज लेकिन कम गंभीर

पिछले साल दिसंबर के मध्य में हॉन्कॉन्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सबसे पहले यह बताया कि ओमिक्रॉन वेरिएंट कैसे श्वसन तंत्र को संक्रमित और प्रभावित करता है. इस स्टडी में इन वैज्ञानिकों ने कहा कि यह वेरिएंट डेल्टा और SARS-CoV-2 के अन्य सभी वेरिएंट्स की तुलना में 70 गुना अधिक तेजी से संक्रमित करता है. इस स्टडी यह भी बताया गया कि ओमिक्रॉन वेरिएंट फेफड़ों के अंदर पिछले अन्य वेरिएंट्स के मुकाबले कम कम घातक साबित हुआ है जिस वजह से गंभीर बीमारी का कारण नहीं बना.

चूहों में भी कम संक्रमण का कारण बना ओमिक्रॉन वेरिएंट

29 दिसंबर 2021 को जारी हुई एक स्टडी में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की वायरोलॉजिस्ट माइकल डायमंड और उनकी टीम ने दावा किया कि चूहों में भी ओमिक्रॉन वेरिएंट कम संक्रमण और रोग का कारण बना है.
इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं के दल ने चूहों और हेमसटर्स पर अन्य सभी वेरिएंट्स के प्रभावों से जुड़ी स्टडी की. इस दौरान उन्होंने यह पाया कि इन जानवरों के फेफड़ों में कुछ दिनों के ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण वायरल का प्रभाव कम हुआ और यह पिछले वेरिएंट्स की तुलना में 10 गुना कम था. इस स्टडी में बताया गया कि ओमिक्रॉन वेरिएंट का संक्रमण श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में ही रहता है जिसकी वजह से यह गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता है.

वहीं, ब्रिटेन में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने प्रयोगशाला में विकसित फेफड़ों की कोशिकाओं का उपयोग करके इसे समझने का प्रयास किया.

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