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मुजफ्फरपुर : ओमिक्रॉन वैरिएंट से ज्यादा प्रदूषण व धूल के खाै’फ से शहर में लाेग लगा रहे हैं मास्क

काेराेना के ओमिक्राॅन वैरिएंट के नए केस देश के कई राज्याें में भी मिलने से लगे हैं। लेकिन, शहर में इससे ज्यादा खाैफ प्रदूषण और धूल का है। मास्क लगानेवालाें में अधिकतर लाेग धूल-प्रदूषण से बचने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। दरअसल, शहर का प्रदूषण लेवल लगातार खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने भी जिला प्रशासन व नगर निगम काे इसके खतरे काे लेकर आगाह किया है।

लेकिन, नियंत्रण के लिए ठाेस सरकारी उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इससे शहर की सड़काें पर बिना मास्क लगाए चलना मुश्किल हाे गया है। चिकित्सकाें का कहना है कि अभी प्रदूषण के जाे हालात हैं उससे लाेग बीमार ताे हाे ही रहे हैं। बिना मास्क लगाए 4 घंटे बाहर रहने पर औसत आयु भी कम से कम 5 वर्ष घट जाएगी। आइए जानते हैं चिकित्सकाें से कि हवा के जहरीली हाेने व सड़काें पर धूल उड़ने से क्या-क्या परेशानी हाे रही और इससे कैसे बचा जाए।

जानलेवा हुआ प्रदूषण तो छिड़काव मशीन खरीदने की हो रही कवायद
शहर की हवा में धूल की मात्रा को कम करने के लिए नगर निगम ने दो वाटर स्प्रिंकलर खरीदने की कवायद शुरू कर दी है। नेशनल क्लीयर एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को राशि आवंटित की है। इस राशि का उपयोग प्रदूषण की रोकथाम के लिए किया जाएगा। इसमें डस्ट का उठाव, पानी का छिड़काव, जगह-जगह पौधरोपण और जागरुकता अभियान चलाना शामिल है। नगर निगम ने 60-60 लाख की लागत से दो वाटर स्प्रिंकलर मशीन खरीदने के लिए जेम पोर्टल पर टेंडर किया है।

बोले चिकित्सक- प्रदूषण से रोग बढ़ रहे, औसत आयु घट रही

रेड जाेन में है शहर, मास्क लगाकर ही घर से निकलें
शहर का प्रदूषण लेवल लगातार रेड जाेन में है। पीएम 10 व पीएम 2.5 दाेनाें खतरनाक हैं। लेकिन, स्माल पार्टिकल यानी पीएम 2.5 अत्यधिक नुकसानदायक है। प्रदूषण में सबसे अधिक मात्रा इसी की रहती है। यह नाक, आंख, मुंह में जाने से स्वस्थ लाेगाें काे बीमार बना रहा है। बिना मास्क लगाए इस वातावरण में चलने पर यदि औसत आयु 78 वर्ष है ताे 70-72 वर्ष हाे जाएगी। -डाॅ. नवीन कुमार, फिजिशियन

प्रदूषण व कोरोना दोनों ही लंग्स को करता प्रभावित
काेराेना काल में प्रदूषण खतरे की घंटी है। काेराेना व प्रदूषण दाेनाें लंग्स काे प्रभावित करता है। यदि प्रदूषण से फेफड़े खराब हाेते हैं ताे इम्युनिटी कम हाेने या बीमार हाेने पर काेराेना संक्रमित हाेने का खतरा भी 70 प्रतिशत बढ़ जाता है। मास्क लगाने से दाेनाें से नुकसान 50 प्रतिशत तक कम हाे जाता है। मास्क भी हर दिन बदलते रहें। बच्चे भी मास्क लगाकर ही बाहर निकलें। -डाॅ. एमएन कमाल, शिशु राेग विशेषज्ञ, सदर अस्पताल

प्रदूषण से बढ़ रहे हैं पुराने रोग, कैंसर तक का खतरा
प्रदूषण से पुरानी बीमारियां बढ़ जाती हैं। प्रदूषित हवा की वजह से सांस की नलियाें में सूजन हाे जा रहा। अस्थमा के मरीजाें में परेशानी 40% बढ़ गई है। बिना मास्क लगाए लगातार रेड जाेन में चलने पर वाहनाें के धुएं व धूल के सूक्ष्म कण आंखाें में जाने पर राेशनी कम हाे जाएगी। इसमें लेड, सल्फर आदि भी हाेते हैं। नाक-मुंह के जरिए अंदर जाने पर कैंसर तक का खतरा रहता है। -डाॅ. एके दास, फिजिशियन।

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