प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानून वापस लेने के फैसले के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि इसे किसलिए लाया गया था और क्यों वापस लिया जा रहा है। इसमें कुछ ख़ास बोलने का कोई औचित्य नहीं है।
उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव के मद्देनजर तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बारे में कौन, क्या बोलता है मालूम नहीं। सब अपनी-अपनी बातें बोलते रहते हैं, लेकिन आज तीनों कृषि कानूनों के बारे में प्रधानमंत्री जी ने स्वयं अपनी बातें रख दी हैं। सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। विपक्ष को भी अपनी बातें रखने का अधिकार है।
जातीय जनगणना पर जल्द सर्वदलीय बैठक
दिल्ली में लालू प्रसाद यादव के जातीय जनगणना के बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनसे अभी हमारी कोई बातचीत नहीं होती है। जातीय जनगणना को लेकर उनकी पार्टी के नेता और उनके पुत्र तेजस्वी यादव समेत अन्य दूसरे लोगों ने हमसे मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री जी से भी हम लोगों ने इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। जातीय जनगणना के मुद्दे पर केन्द्र ने निर्णय स्पष्ट कर दिया है। उसके बाद हम लोगों ने भी बहुत साफ-साफ कह दिया है कि आपस में हम सब बैठक कर इस पर निर्णय लेंगे। तेजस्वी यादव ने जो चिट्ठी लिखी थी, वह उनकी पार्टी की तरफ से आया हुआ है और वह चिट्ठी रखी हुई है। हम सब एक साथ सर्वसम्मति से इस पर निर्णय लेंगे।

कुछ लोग पूर्ण शराबबंदी के फैसले के खिलाफ
पूर्ण शराबबंदी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग मेरे इस फैसले के खिलाफ हैं और धंधेबाज चाहते हैं कि शराबबंदी कानून विफल हो जाए। हम तो प्रारंभ से ही कहते रहे हैं कि हर आदमी एक विचार का होगा, यह संभव नहीं है। हम लोगों ने अलग-अलग समय पर नौ बार इसकी समीक्षा भी की है। जितनी बातें कही गयीं उन सब चीजों पर चर्चा की गयी। इसके बारे में हमने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूरे तौर पर आप काम करिए।




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