छात्रवृति की मांग काे लेकर बुधवार काे एसकेएमसीएच के 2016 बैच के एमबीबीएस इंटर्न रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद करा दिया। सुबह 8 से दोपहर 1 बजे तक 5 घंटे ओपीडी रजिस्ट्रेशन बंद करा हंगामा किया।
नारेबाजी की। इससे मुजफ्फरपुर जिले के देहात, शिवहर, सीतामढ़ी और मोतिहारी के दूर-दराज गांवों से पहुंचे 2000 से अधिक मरीजों काे बिना इलाज लाैटना पड़ा। हंगामा और नारेबाजी के बीच करीब एक बजे अधीक्षक डाॅ. बीएस झा ने छात्रों काे उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने की जानकारी भिजवाई। तब ओपीडी खुला। इसके बाद करीब 125 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हाे सका।

लेकिन, अधिकतर ओपीडी में चिकित्सक नहीं थे। कुछ का ही इलाज हाे सका, अधिकतर रोगी लौट गए। छात्रों की इंटर्नशिप राशि बढ़ाने की मांग पूरी की जा सकती है। लेकिन, इन मरीजों काे हुए कष्ट, खर्च पैसे और समय की भरपाई नहीं हाे सकती। इंटर्न का कहना था कि उन्हें 14 हजार 800 रुपए मिलते हैं। इसे बढ़ा कर 27 हजार करना चाहिए।
राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में बुधवार काे इसी मांग के समर्थन में ओपीडी सेवा ठप की गई। डाॅ. नवनीत कश्यप ने कहा- आईजीआईएमएस के इंटर्न काे मात्र दाे दिन की हड़ताल के बाद बढ़ी रकम मिल गई। इसलिए उनकी मांग भी पूरी हाेनी चाहिए। प्रदर्शन में डाॅ प्रदीप, डाॅ राजेश रंजन, डाॅ किशाेर, डाॅ नवनीत कुमार, डाॅ श्वेतांक और डाॅ संजना दीक्षा समेत 100 के करीब इंटर्न थे।

ओपीडी बंद है, आप कहीं और जाइए…
एसकेएमसीएच में तैनात सुरक्षाकर्मी काे कंधे पर लादे पहुंचे परिजन काे यह समझाते हुए बाहर का रास्ता दिखा रहा है।

शिवहर से आए 85 वर्ष के किडनी मरीज बेबस लौटे

शिवहर के नरवारा के 85 साल के ललन सिंह किडनी के रोगी हैं। उन्हें पेशाब के लिए नली लगी थी। तेज दर्द के बाद बाइक से एसकेएमसीएच पहुंचे। उनका इलाज नहीं हुअा। अलीनेउरा की प्रीति कुमारी बुखार पीड़ित 5 माह के बेटे जियांश और गिद्धा की साेना कुमारी को 8 माह के बेटे काे लेकर मायूस लौटना पड़ा।

बखरी से ठेले पर पहुंची महिला, नहीं हुआ इलाज
जैसे-जैसे दिन बढ़ता गया, मरीजों की संख्या के साथ उनका मर्ज भी बढ़ता गया। लेकिन, इंटर्न का कलेजा नहीं पसीजा। काउंटर काे बंद कराए रखा। कई बार छात्रों और मरीज के परिजनों के बीच झड़प की नौबत बन आई। बखरी से पति के ठेले पर पहुंची महिला को बिना इलाज लौटना पड़ा।
107 कदम की दूरी, दफ्तर में बैठे अधीक्षक व उपाधीक्षक काे सुध नहीं
ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर के आसपास दर्द से कराहते मरीजों काे देखने न एसकेएमसीएच अधीक्षक पहुंचे और न ही उपाधीक्षक। जबकि, दाेनाें ही का दफ्तर काउंटर से नाप कर कर महज 107 कदम की दूरी पर है। 12.45 बजे के बाद अधीक्षक ने गार्ड के जरिए छात्रों की मांग सरकार तक पहुंचाने की सूचना भेजी। करीब 1 बजे इंटर्न प्रदर्शन खत्म कर चले गए। वैसे, इमरजेंसी में सेवा जारी थी।
अधीक्षक का दावा,त्योहारों के कारण कम ही संख्या में पहुंचे थे रोगी
- त्याेहार हाेने के कारण कम संख्या में मरीज ओपीडी में आए थे। प्रदर्शन कर रहे इंटर्न छात्रों का ज्ञापन काे सरकार काे भेज दिया गया। नीतिगत मामला है। सरकार ही फैसला लेगी। छात्रों ने कुछ देर रजिस्ट्रेशन काउंटर काे बंद कराए। किसी अनहोनी की सूचना नहीं है। – बीएस झा, अधीक्षक

छात्र बाेले- 27000 स्टाइपेंड हमारा हक
प्रदर्शनकारी छात्राें का कहना था कि फिलहाल उन्हें 14800 रुपए मिलते हैं। इसे बढ़ाकर 27000 करने की मांग तीन सालाें से कर रहे हैं। हर बार सरकार आश्वासन ही देती है। इसकाे बिहार के सभी मेडिकल काॅलेजाें में बुधवार काे ओपीडी बाधित किया गया। आईजीआईएमएस के इंटर्न छात्राें काे मात्र दाे दिन के हड़ताल के बाद उनकी मांगें पूरी कर दी गई। ऐसे में अन्य मेडिकल काॅलेज के साथ भेदभाव क्याें हाे रहा है। स्टाइपेंड की मांग हमारा हक है।



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