BIHARBreaking NewsSTATE

मुजफ्फरपुर :हरी सब्जियों के दाम छू रहे आसमान, स्वाद लेना हुआ मुश्किल

हरी सब्जियों के दाम छू रहे आसमान, स्वाद लेना हुआ मुश्किल

ओमप्रकाश दीपक
मुजपफरपुर। बाजार में इनदिनों हरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। बढ़ती कीमत के कारण आमलोगों को स्वाद लेना मुश्किल हो गया है। हरी सब्जियों की कीमत में तेवर पिछले चार माह से बनी हुई है। भादों माह वाले हरी सब्जियों की उत्पादन अब अंतिम चरण पर है।

इसके बाद अगहन माह वाले सब्जियों की उत्पादन होगा। ऐसे पौधों से सब्जी निकलने में एक माह विलम्ब है। वहीं मई के बाद रूक-रूक हुई बारिश के कारण अधिकांश हरी सब्जियों के पौधे गल जाने के कारण उत्पादन में कमी आ गयी है।

बाजार की हालात यह है कि चालीस रुपये प्रतिकिलो से कम में कोई भी हरी सब्जियां मंडियों में उपलब्ध नहीं है। सब्जियों के बढ़ते कीमत के कारण लोगों ने अब बेसन, काबली चना , मटर, चना, सोयाबीन का स्वाद ले रहे है। सब्जियों की बढ़ती कीमत का कारण बाढ़ से फसल बर्वाद होना बताया जा रहा है।

इस बार खेतों में लगे सतर प्रतिशत हरी सब्जियां बाढ़ के पानी में डूब कर बर्वाद हो गया है। उपरी खेतों में लगे पौधों से ही हरी सब्जियां बाजार में आ रही है।

बेसन, चना, सोयाबड़ी एवं मटर की मांग बाजार में बढ़ गई है। बाजार में बेसन सौ से एक सौ दस रुपये, चना पैसठ से सत्तर रुपये, मटर सतर से अस्सी रुपये, काबली चना नब्बे से सौ रुपये एवं सोयाबड़ी एक सौ बीस रुपये प्रतिकिलो की दर से बिक्री हो रही है।

बाजार में इनदिनों भिण्डी, नेनुआ, करैला, बैगन,कुंदरी एवं खीरा चालीस से पचास रुपये प्रतिकिलो की दर से बिक्र रही है। वहीं परवल, बड़बटी, अरुई साठ रुपये, टमाटर साठ एवं फुलगोभी सौ रुपये प्रतिकिलो की दर से बेचा जा रहा है। कद्दू चालीस से पचास रुपये प्रतिपीस की दर से बाजार में उपलब्ध है।

जिले में हरी सब्जियों की खेती ज्यादातर किसान बूढ़ी गंडक नदी के किनारे तट बंध पर करते है। इसके साथ ही जिले के बोचहा, मीनापुर, कांटी, मोतीपुर, कुढ़नी, सकरा, सरैया, गोरौल आदि प्रखंडों में हरी सब्जियों की खेती है।

इसके साथ ही वैशाली जिले सराय एवं भगवानपुर से भी हरी सब्जियों की आवक है। वहीं बूढी गंडक नदी के किनारे परवल, नेनुआ, करैला, कद्दू एवं खीरा की खेती ज्यादातर किसान करते है। लगातार हुई बारिस से निचले भूमि में जलजमाव के कारण फसल बर्वाद हो गया। वहीं नदी में पानी बढ़ जाने के कारण खेतों में लगे फसल डूब गये। जब तक मौसम साफ था हरी सब्जियों का उत्पादन बेहतर हुआ।

मार्च से लेकर मई तक बाजार में इसकी कीमत काफी कम रहा। अधिकांश हरी सब्जियों पांच से लेकर बीस रुपये प्रतिकिलो की दर बिक्री हुई। कदृदू दस से बीस रुपये प्रतिपीस की दर से बिक्री हुई। सब्जी विक्रेता बच्चेलाल ने बताया कि भादों माह वाले हरी सब्जियों के पौधे अब अंतिम चरण पर है। नये पौधे से सब्जी निकलने में एक माह विलम्ब है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.