खाद्य संरक्षण कानून सख्त होने के बाद भी जिले में धड़ल्ले से मिलावटी खाद्य सामान की बिक्री कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ जारी है। कारण जिस खाद्य सुरक्षा विभाग पर इसे राेकने की जिम्मेदारी है उसके अधिकारी हाेली-दिवाली में ही सैंपल लेने निकलते हैं। उसमें भी अधिकतर सैंपल की या ताे रिपाेर्ट नहीं आती, या फिर जांच फाइल में ही दबी रह जाती है।
आश्चर्य ताे यह है कि 10 वर्षाें में लिए गए सैंपल में करीब 150 की जांच में ही मिलावट की पुष्टि हुई। उसमें भी इस वर्ष महज 3 काराेबारियाें पर 10-10 हजार का जुर्माना लगाया गया। उक्त जुर्माना मिस ब्रांड (क्वालिटी से छेड़छाड़) के आराेप में न्यायालय ने लगाया। बता दें कि जांच के लिए हर वर्ष हाेली-दिवाली के दाे-तीन दिन पूर्व जिला प्रशासन मजिस्ट्रेट व पुलिस जवानाें की प्रतिनियुक्ति करता है। दाे दिन टीम विभिन्न दुकानाें में जाकर लड्डू, छेना, पेड़ा व अन्य खाद्य पदार्थाें का सैंपल लेती है। लेकिन, अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हाे सकी है।

सैंपल सुरक्षित रखने को मिले डीप फ्रीजर महीनों बाद भी इंस्टाॅल तक नहीं
मछली में लेड व कारखाने में सड़े लड्डू मिले, फिर भी सिर्फ चेतावनी
आंध्र प्रदेश की मछलियाें में लेड मिलने की पुष्टि हुई थी। विभाग ने दबाव के बीच 3 काराेबारियाें पर केस दर्ज कराया, पर काेई कार्रवाई नहीं हुई। 3 साल पूर्व दाे मिठाई कारखानाें से कई क्विंटल सड़े हुए लड्डू मिले थे। उसमें भी काराेबारी काे सिर्फ चेतावनी दे छाेड़ दिया गया।

इनके अलावा शहर की कई बड़ी मिठाई दुकानाें में गंदगी व मिलावट की पुष्टि हुई, पर कार्रवाई सिफर है। अब भी धड़ल्ले से मिलावटी सामान बेचे जा रहे हैं। बल्कि, नगर थाना से करीब 100 मीटर की दूरी पर ही पीएन राय गली में सरेआम मिलावटी व घटिया क्वालिटी की मिठाइयां, पनीर, बुंदिया आदि सामान बिक रहे हैं।
अन्य खाद्य सामग्री में भी मिलावट की हाे चुकी है पुष्टि 11 पर केस भी, इसके बावजूद किसी पर कार्रवाई नहीं
बेसन, सत्तू, दाल व अन्य खाद्य सामग्री में भी मिलावट की पुष्टि हाे चुकी है। बीते अगस्त में जीरोमाइल, बैरिया, भगवानपुर, आनंदपुरी, सरैयागंज, सादपुरा, आमगोला की दुकानों से मिठाई, खोया, पनीर, बेसन, सत्तू, काजू बर्फी, रसगुल्ला, मैदा आदि के 42 सैंपल लेकर जांच को पटना भेजे गए थे। 10 सैंपल मिसब्रांडेड, जबकि सादपुरा की एक मिठाई दुकान की काजू बर्फी का नमूना अनसेफ मिला। शहर के 11 दुकानदारों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम में केस दर्ज करने के सिवा कोई कार्रवाई नहीं हुई।

डाटा एंट्री ऑपरेटर के भराेसे कार्यालय
यहां के जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी सीतामढ़ी के भी प्रभार में हैं। यहां का कार्यालय सिर्फ एक डाटा एंट्री ऑपरेटर के भराेसे चलता है। कंप्यूटर 6 माह से खराब है। आश्चर्य ताे यह है कि सैंपल सुरक्षित रखने के लिए 6 महीने पूर्व मिले 3 डीप फ्रीजर को अब तक इंस्टाॅल भी नहीं किया जा सका है।

- रूटीन में सैंपल ले जांच को लेबाेरेटरी भेजा जाता है। अनसेफ या मिस ब्रांड होने पर कार्रवाई के लिए न्यायालय काे भेजते हैं। -सुदामा चाैधरी, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।



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