जिला प्रशासन इस बार काेविड गाइडलाइन और विधि व्यवस्था की 12 शर्तों पर सार्वजनिक दुर्गापूजा की अनुमति देगा। किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में पूजा समिति के जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हाेगी। मंगलवार कानेे जारी प्रशासनिक आदेश के अनुसार पूजा पंडाल या जुलूस में वैसे व्यक्ति ही शामिल हो सकेंगे, जिन्हें काेराेना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हाे। इसके लिए टीका प्रमाण पत्र दिखाना हाेगा।
यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूजा आयोजक/लाइसेंसधारी की होगी। यदि मजिस्ट्रेट की जांच में काेई बिना वैक्सीन लिए व्यक्ति पकड़ा जाएगा, ताे संबंधित पूजा समिति के पदाधिकारियाें-सदस्याें के खिलाफ कार्रवाई हाेगी। पुलिस भी जुलूस में शामिल लाेगाें कानेे राेक कर प्रमाणपत्र की जांच कर सकती है।

पूजा की अनुमति के लिए लाइसेंस आवेदन फॉर्मेट पर सभी 12 शर्तें लिखी हैं। पूजा में मेला आयोजन पर सख्ती से राेक रहेगी। न ताे डीजे बजा सकेंगे और न ही आतिशबाजी हाेगी। लाउडस्पीकर की संख्या अाैर और आवाज का स्तर एसडीओ तय करेंगे। इस बाबत एसडीओ पूर्वी और नगर डीएसपी ने थानेदारों के साथ बैठक की।

थानेदारों कानेे तय गाइडलाइन के साथ शांतिपूर्वक पूजा संपन्न कराने का जिम्मा दिया। थानेदार और सीओ लाेगाें कानेे शर्तों के बारे में बताएंगे, ताकि काेई भ्रम नहीं रहे। उल्लेखनीय है कि पूजा का लाइसेंस लेने वाली समिति 10 सदस्यों का पूरा ब्योरा तस्वीर के साथ थाने में देगी।
इन्हें भी काेविड वैक्सीन की दाेनाें डाेज लेने का प्रमाणपत्र देना हाेगा। तभी लाइसेंस मिलेगा। किसी प्रकार की समस्या के लिए ये 10 सदस्य ही जिम्मेदार माने जाएंगे। इन पर कानूनी कार्रवाई हाेगी।
सख्ती : विधि व्यवस्था की समस्या पर समिति के 10 सदस्य होंगे जिम्मेदार
पूजा समितियाें को इन 12 शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा

1. कोविड प्रोटोकॉल के पूर्ण अनुपालन की जवाबदेही आयोजक की होगी। 2. किसी प्रकार का खेल/तमाशा व मेले के आयोजन की अनुमति नहीं होगी। 3. पंडाल की लंबाई और चाैड़ाई 50X50 फीट से अधिक नहीं हो सकेगी। 4. प्रत्येक पंडाल में सीसीटीवी कैमरा/अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य होगा। 5. ग्रामीण क्षेत्र के जुलूस का विसर्जन ग्रामीण क्षेत्र में ही स्थानीय स्तर पर होगा। 6. मास्क लगाना और सामाजिक दूरी का पालन करना भी जरूरी हाेगा। 7. कार्यक्रम में डीजे पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। 8. वैक्सीन ले चुके 10 वाॅलंटियर्स की तस्वीरें हस्ताक्षर के साथ देना होगा। 9. विधि-व्यवस्था की समस्या के लिए आयोजक-वाॅलंटियर्स जिम्मेदार होंगे। 10. पंडाल/जुलूस में बिना वैक्सीन वाले के शामिल हाेने के जिम्मेदार लाइसेंसधारी हाेंगे। 11. आयोजक/लाइसेंसधारी की जिम्मेदारी समय पर प्रतिमा विसर्जन की भी हाेगी। 12. आयोजक ही विसर्जन जुलूस में अधिकतम 25 व्यक्तियाें की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
15 को हर हाल में प्रतिमा िवसर्जन
प्रशासन के निर्देश के अनुसार 15 अक्टूबर की शाम 8 बजे तक हर हाल में प्रतिमा विसर्जन कर लेनी है। विसर्जन जुलूस में 25 से अधिक लाेग नहीं रहेंगे। विसर्जन में देरी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण इलाके में प्रतिमा विसर्जन पूजा के नजदीकी क्षेत्र में ही करना है। सीओ और थानेदार से विसर्जन जुलूस का रूट पहले तय करना हाेगा। इसके लिए शांति समिति की बैठक हाेगी।

अग्निशमन यंत्र लगाना आवश्यक
पूजा पंडाल में बिजली के लिए विधिवत कनेक्शन लेना हाेगा। इसके लिए शहरी क्षेत्र में 2800 रुपए फीस लगेगा। आग से बचाव के लिए पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूजा समिति की हाेगी। पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे और अग्निशमन यंत्र लगाना हाेगा। प्रशासनिक अधिकारी इसकी जांच करेंगे। कमियां पाई गईं, तो कार्रवाई होगी।



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