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#PATNA : भूमि सुधार मंत्री के नेतृत्व में DCLR की एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित, कई दिशा निर्देश जारी

पटना : भूमि सुधार उप समाहर्ता राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग एवं राजस्व प्रशासन के आधार स्तंभ हैं। उनकी स्थिति छत और जमीन के बीच की है। उन्हें उपर भी देखना है और नीचे भी। अगर भूमि सुधार उप समाहर्ता अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही तरीके से करें तो विभाग की कार्यप्रणाली और छवि दोनों में सुधार होगा। ये बातें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री श्री राम सूरत कुमार ने भूमि सुधार उप समाहर्ताओं के एक दिवसीय कार्यशाला सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कहीं। राजस्व मंत्री ने कहा कि आम लोगों में जिला कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के प्रति बहुत आदर और सम्मान हैं। आपको जो नई भूमिका मिली है वह एक न्यायाधाीष की ही है। अगर आप निष्पक्ष होकर काम करेंगे तो आम लोगों में आपकी और विभाग की इज्जत काफी बढ़ जाएगी। इस एक्ट के जरिए आप अपने करियर का चमका सकते हैं और समाज में अपनी अमिट छाप छोड़ सकते हैं।

राजस्व मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई है। और इसी के आलोक में विभाग द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को रैयती जमीन पर टाइटल के मामले में सुनवाई का आदेश निर्गत किया गया है। अभी सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आना बाकि है। ऐसे में भूमि सुधार उप समाहर्ता को अपने आप को साबित करना है कि उनको रैयती जमीन के टाइटिल के मामले में सुनवाई का अधिकार देने का सरकार का फैसला गलत नहीं था। आपका हरेक फैसला तार्किक और नियमसंगत होना चाहिए। अनिश्चितकाल तक किसी भी मामले की सुनवाई टालने की प्रवृति ठीक नहीं है। नियत समय के भीतर सुनवाई की जाए और हरेक सुनवाई एवं अंतिम फैसला को वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। विभाग के वरीय अधिकारी उन फैसलों का अघ्ययन करेंगे और जरूरी निर्देश देंगे।

राजस्व मंत्री ने सभी भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं को अंचलों एवं राजस्व कचहरियों के औचक निरीक्षण करने का निदेश दिया। अंचल अधिकारी द्वारा किए जा रहे कार्यों की गहराई से जांच करने का निदेश दिया। उनका कहना था कि कर्मियों की कमी की वजह से कर्मचारी के मुंशी हलकों में काम कर रहे हैं और उनसे विभाग की बहुत बदनामी हो रही है। साथ ही उन्होंने अंचल अधिकारियों के लिए नियमित अंतराल पर सेमिनार आयोजित करने का निदेश विभागीय अधिकारियों को दिया। उन्होंने बिहार राजस्व सेवा के नए अंचल अधिकारियों को निष्पक्ष होकर काम करने की नसीहत दी और कहा कि पदस्थापन के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के प्रति लगाव या दुराव का भाव प्रदर्शित नहीं करें। साथ ही मंत्री महोदय ने नीचे के कर्मियों द्वारा अपने वरीय अधिकारियों के बारे में असम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी अक्सर फरियादी यह कहते मिलते हैं कि राजस्व कर्मी ने उन्हें धमकाया कि कहां जाओगे लौट के तो मेरे ही पास आना है।

इस मौके पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि शनिवार को होनेवाली बैठक की मॉनिटरिंग एक्टिव मोड में करने की जरूरत है। विभिन्न राजस्व न्यायालयों द्वारा पारित आदेश के क्रियान्यवन का नहीं होना भी भूमि विवादों का एक महत्वपूर्ण कारण है। इन आदेशों का क्रियान्वन भी दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निदेश दिया कि शनिवार को हो रही बैठकों में राजस्व न्यायालयों के आदेषों के क्रियान्वयन का कॉलम अलग से जोड़ा जाए, उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट मंगाई जाए और उच्चस्तर पर इसकी समीक्षा की जाए। बैठक में उपस्थित भूमि सुधार उप समाहर्ताओं द्वारा षिकायत की गई कि उन्हें जिला में राजस्व के अलावे ढेर सारे कार्यों में लगा दिया जाता है जिससे उन्हें राजस्व के कामों के लिए समय नहीं मिल पाता है। अपर मुख्य सचिव द्वारा विभागीय पदाधिकारियों को निदेष दिया गया कि सभी जिला पदाधिकारियों को पत्र देकर ताकिद करें कि भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को हरेक सप्ताह 2 से 3 दिन अन्य कार्यों में ड्यूटी नहीं लगाएं ताकि वो अपना कोर्ट कर सकें।  

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता अपने-अपने अंचलों के बॉस हैं। जहां संदेह हो जाकर देखें कि काम कैसे हो रहा है। विभाग की ऑनलाइन सेवाओं जैसे दाखिल-खारिज, एल0पी0सी0, परिमार्जन, लगान आदि की अनुमंडलवार समीक्षा की गई। सबसे ज्यादा म्युटेशन के लंबित मामले के लिए भूमि सुधार उप समाहर्ता, सीतामंढ़ी से पूछा गया। उन्हें लंबित म्युटेशन के मामलों का जल्द से जल्द निपटारे को कहा गया। ऑनलाइन सेवाओं में खराब प्रदर्शन करने वाले अंचलों के लिए संबंधित भूमि सुधार उप समाहर्ता से पूछा गया और उन्हें 31 मार्च, 2021 के पहले के लंबित मामलों की प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन करने का निदेष दिया गया। अर्थात ऐसा न हो कि जुलाई में डाले गए आवेदनों का निष्पादन पहले हो जाए और मार्च के आवेदन लंबित ही रह जाएं।

इससे पहले पिछले ही महीने विभाग ने अपर मुख्य सचिव स्तर से निर्गत एक पत्र के जरिए रैयती जमीन के मामलों में स्वत्ववाद के निर्धारण का अधिकार पूर्व की तरह भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को बहाल कर दिया था। इससे संबंधित एक पत्र राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा बिहार के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, समाहर्ता, अपर समाहर्ता और सभी भूमि उप समाहर्ताओं को निर्गत किया गया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह के हस्ताक्षर से निर्गत इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 के अन्तर्गत सभी भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं को अधिकृत मामलों से संबंधित वादों की सुनवाई प्रारंभ करने तथा पूर्व के मामलों में पारित आदेश के कार्यान्वयन का आदेश दिया जाता है। इस एक्ट के तहत भूमि सुधार उप समाहर्ता द्वारा पारित आदेश के खिलाफ आयुक्त के पास अपील करने का प्रावधान है।

बिहार राज्य में भूमि विवाद जनित मामलों एवं समस्याओं को त्वरित तथा प्रभावशाली ढंग से निपटारे के दृष्टिकोण से एवं व्यवहार न्यायालयों तथा उच्च न्यायालयों में भूमि विवाद के दायर मामलों में कमी लाए जाने को दृष्टिगत रखते हुए बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009 राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के स्तर से राज्य में लागू एवं प्रभावी किया गया था। भूमि विवादों की सुनवाई के लिए भूमि सुधार उप समाहर्ता इस अधिनियम के तहत् सक्षम प्राधिकार घोषित किए गए। इस अधिनियम के अन्तर्गत रैयती भूमि के मामलों यथा-अतिक्रमण, अनाधिकृत संरचना निर्माण, सीमा-विवाद, आवंटित सुयोग्य श्रेणी के बन्दोबस्तधारी की बेदखली का मामला, भू-खण्ड का विभाजन, आपसी संपत्ति का बंटवारा, सर्वे मानचित्र सहित स्वत्वाधिकार अभिलेख में की गयी प्रविष्टी में संशोधन से संबंधित माामलों का निराकरण हेतु क्षेत्राधिकार निश्चित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत् निष्पादित मामलों के संदर्भ में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0- 1091ध्2013 महेश्वर मंडल एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य याचिकाकर्ता द्वारा माननीय पटना उच्च न्यायालय में दायर किया गया था। इस वाद की सुनवाई करते हुए माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा कतिपय आदेश पारित किये गए। अंततः इस वाद की माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई करते हुए बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 की धारा-3, 4(1), 4(4) एवं 4(5) के संबध में दिनांक 31.07.2018 को आदेश पारित किया गया, जिसके अधीन धारा 4(4) के तहत कोई आदेश पारित नहीं किये जाने तथा धारा 4(5) को बाध्यकारी घोषित किये जाने से संबंधित था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के क्रिन्यावयन पर रोक लगा दी गई।

इस कार्यशाला का आयोजन पटना के पुराना सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में किया गया था। कार्यशाला में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम सूरत कुमार के अलावा विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह और निदेशक, भू-अभिलेख और परिमाप जय सिंह समेत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सभी वरीय पदाधिकारी भी उपस्थित थे। इसके अलावा कोशी, दरभंगा, गया और भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त भी इस कार्यशाला में शामिल हुए। बिहार के सभी 101 अनुमंडलों के भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं का बैठक के लिए बुलाया गया था जिसमें से 84 भूमि सुधार उपसमाहर्ता उपस्थित हुए।

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