मार्च 2020 के बाद कोरोना से मरने वाले लोगों के बच्चों से स्कूल पूरे एकेडमिक साल की फीस नहीं लेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने मुजफ्फरपुर समेत सभी डीईओ को इस संबंध में निर्देश जारी किया है। यह आदेश सरकारी व निजी दोनों स्कूलों पर लागू होगा।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से 26 सितंबर को इस संबंध में अलग-अलग विभाग को निर्देश दिया गया है। इसमें शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है ऐसे बच्चे जिन्होंने मार्च 2020 के बाद अपने माता या पिता या फिर दोनों को खो दिया है, उनसे निजी स्कूल वर्तमान शैक्षणिक सत्र का किसी भी तरह का शुल्क नहीं लेंगे। मुजफ्फरपुर समेत सभी जिलों में इसके पालन का आदेश राज्य सरकार को दिया गया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने डीईओ को इस आदेश के तहत कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट मांगी है।

सात अक्टूबर को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पूरी रिपोर्ट देनी है। इस तिथि को सुनवाई होनी है। ऐसे में जिले से 30 सितम्बर तक रिपोर्ट मांगी गई है। इसके साथ ही समाज कल्याण निदेशक ने सभी डीएम से पीएम केयर फंड योजना के तहत बच्चों को दिए गए लाभ पर भी 30 सितम्बर तक रिपोर्ट मांगी है
डीईओ अब्दुस्सलाम अंसारी ने कहा कि निदेशक का पत्र हमें सोमवार देर शाम मिला है। इस पत्र के आलोक में सभी निजी स्कूल को निर्देश दिया जा रहा है। जिनके भी अभिभावक या कोई एक भी मार्च 2020 के बाद असमय काल की गाल में समाए हैं, उनसे फीस नहीं ली जाएगी। अगर स्कूल ऐसा करते हैं तो बच्चे के माता या पिता तुरंत सूचना दें, इस पर कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूल से यह रिपोर्ट भी मांगी जा रही है कि उनके यहां ऐसे कितने बच्चे हैं।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल के सचिव सुमन कुमार ने कहा कि कई स्कूल हैं जिन्होंने इस पर निर्णय पहले ही लिया था। ऐसे बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। कोर्ट के आदेश का सभी स्कूलों को पालन करना होगा। एसोसिएशन भी इस पर कार्रवाई करवाएगा।
स्कूल प्रबंधन शुल्क के लिए लगातार बना रहे दबाव
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की जमीनी कार्रवाई हुई तो जिले में कई माता-पिता को राहत मिलेगी जो स्कूल प्रबंधन के दबाव में पिस रहे हैं। विभिन्न बड़े स्कूलों में पिछले दिनों इस तरह के कई मामले सामने आए हैं जहां बच्ची की मां अपने पति के कोविड से गुजर जाने की दुहाई देते हुए फीस में माफी की गुहार लगाती रही, लेकिन स्कूल प्रबंधन का दबाव यह कि जब तक शुल्क नहीं जमा होगा बच्ची परीक्षा में शामिल नहीं हो सकती।



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