कोरोना से टीबी संक्रमितों की जान पर बड़ा खतरा है। संक्रमण से जूझ रहे मरीजों को सेकेंड्री इंफेक्शन से बचाने को लेकर बिहार सरकार की तरफ से बड़ा सर्च ऑपरेशन चल रहा है। इसमें टीबी से संक्रमितों की तलाश की जा रही है। सरकार ने 9 नवंबर तक सर्च ऑपरेशन पूरा करने को लेकर समय सीमा निर्धारित कर दी है। अब स्वास्थ्य विभाग की तरफ से टीबी के सक्रिय मरीजों को ट्रैक करने का काम किया जा रहा है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर टीबी मरीजों की सुरक्षा को लेकर यह बड़ी मुहिम चलाई जा रही है।
टीबी संक्रमितों पर बड़ा अटैक
कोरोना का संक्रमण ऐसे मरीजों पर भारी पड़ता है जिनकी इम्युनिटी या फिर लंग्स कमजोर पड़ गए हें। ऐसे मरीजों की इम्युनिटी बढ़ाकर उन्हें कोरोना से बचाने का बड़ा अभियान बिहार सरकार की तरफ से चलाया जा रहा है। इस अभियान से दो बड़े मिशन पर काम हो रहा है। एक तरफ टीबी संक्रमितों को कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाने की दिशा में बड़ा काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिहार को टीबी मुक्त बनाने में भी बड़ी पहल हो रही है। 9 नवंबर तक टीबी के रोगियों को खोजकर उनकी दशा कराने को लेकर अलर्ट मोड पर काम करने का निर्देश है।

बिहार को टीबी मुक्त करने का काम
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बिहार को टीबी मुक्त बनाने के लिए सरकार मिशन मोड पर काम कर रही है। इसके लिए हर स्तर पर काम किया जा रहा है। टीबी उन्मूलन की दिशा में समुदाय स्तर पर लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत विभिन्न चरणों में 9 नवंबर तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर ऑपरेशन सर्च चल रहा है। इसमें टीबी के सक्रिय रोगियों की खोज को लेकर अलर्ट मोड पर काम हो रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर टीबी के मरीजों की पहचान करेगी। अभियान के तहत निक्षय पोषण योजना अभियान को भी गति देने के लिए योजना बनाई गई है।
टीबी को डिटेक्ट करने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि निक्षय पोषण योजना के तहत जिन लोगों को योजना की राशि नहीं मिली है, उन्हें 30 सितंबर तक भुगतान करना है। टीबी जांच शिविरों का आयोजन कर टीबी जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा शहरी मलिन बस्तियों, महादलित टोला, नव निर्वित कार्यस्थल पर काम करने वाले श्रमिकों में टीबी की स्क्रीनिंग तथा उनकी जांच की जाएगी। वहीं जिला एवं अनुमंडल स्तर के कारागृह, सुधारगृह, बाल संरक्षण गृह, पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कैदी एवं बच्चों की स्क्रीनिंग एवं स्प्यूटम जांच की जाएगी। रोगियों की खोज, दवा देने का तरीका सिखाने के लिए कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। अभियान के माध्यम से टीबी रोगियों की पहचान के काम में तेजी आएगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा जिससे वह सेकेंड्री इंफेक्शन के खतरे से बच सकेंगे।
अगर लक्षण हो तो कराएं जांच
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी का हल्का-सा भी लक्षण दिखे तो जांच कराने स्वास्थ्य केंद्र अवश्य जाएं। जांच में पुष्टि के बाद स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त में दवा मिलेगी। राज्य के सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की भी व्यवस्था है। अगर समय से टीबी डिटेक्ट हो जाता है तो मरीजों को काफी राहत होती है। ऐसे मरीजों को इलाज से ठीक कर उन्हें सेकेंड्री इंफेक्शन से पूरी तरह से सेफ किया जाता है।



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