बाढ़ ने पटना की 165 सड़कों की लाइफ खत्म कर दी। यह सड़कें बाढ़ के पानी के कारण जगह-जगह टूट गई हैं। गंगा और सोन के साथ उसकी सहायक नदियों ने पटना के 3 लाख लोगों की जिंदगी को पानी-पानी कर दिया। 5361 लोगों को जहां बेघर कर दिया, वहीं 13312.85 हेक्टेयर की फसल को भी बर्बाद कर दिया। यह चौंकाने वाला खुलासा प्रशासन की एक रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पटना जिले में 23 प्रखंडों के 91 पंचायत और 405 वार्ड बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से 91,124 परिवार पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं जबकि बाढ़ प्रभावित जनसंख्या 3 लाख 48 हजार 932 है। पटना में 3322 गरीबों की झोपड़ी और 2039 गरीबों का कच्चा घर बाढ़ में बह गए।


बाढ़ ने बेजुबानों का बड़ा नुकसान किया
रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ में इंसानों के साथ बेजुबानों का बड़ा नुकसान हुआ है। पटना में 2614 पशु शेड भी पानी में बह गए, हालांकि बाढ़ आपदा के दौरान पटना में बचाव को लेकर सराहनीय पहल हुई है। प्रशासन के साथ मददगारों ने भी बेहतर काम किया है। बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद कर अब उन्हें फिर से पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।

289 मोटर बोट चलाकर प्रभावितों तक पहुंचाई गई राहत
पटना में 24517 लोगों का तो बाढ़ की तबाही के बाद कोई सहारा ही नहीं था, प्रशासन ने उन्हें अलग व्यवस्था दी थी। 289 मोटरबोट चलाकर प्रभावित लोगों को राहत दी गई। प्रशासन ने लोगों को 28391 पॉलिथीन सीट देकर पानी से बचाव का सहारा दिया। 87,876 सूखे राशन का पैकेट बनाकर लोगों को दिया गया। बचाव को लेकर जिले में कुल 17 आपदा राहत केंद्र चलाए गए जिसमें कुल 4 लाख 28 हजार 993 को भोजन और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दूध दिया गया। 7493 किट (वस्त्र एवं बर्तन) का वितरण भी किया गया।

बच्चों को दिया गया खिलौना
बाढ़ के दौरान बच्चों की मानसिक स्थिति पर प्रभाव न पड़े, इसलिए खिलौना से लेकर कपड़े तक की व्यवस्था की गई थी। हर नवजात बच्ची को 15 हजार और नवजात बच्चे को 10 हजार का चेक दिया गया। बाढ़ प्रभावित 10 हजार 902 लोगों का उपचार, 3858 का कोरोना टेस्ट, 4481 को कोरोना टीका लगाया गया। 6238 पशु बीमार हुए तो 2113.87 क्विंंटल चारा देकर जानवरों की जान बचाई गई।




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