बिहार के सरकारी प्रारंभिक स्कूलों में दूसरी कक्षा से 8वीं कक्षा तक में पढ़ने वाले 1 करोड़ 29 लाख 6682 छात्र-छात्राओं को सोमवार के बाद किताब के पैसे मिल जाएंगे। चौथी तक के हर बच्चे को 250 रुपए जबकि 5वीं से आठवीं तक के प्रति विद्यार्थी 400 रुपए किताबों की खरीद के लिए दिए जाएंगे। पैसे बच्चे या अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजे जाएंगे।

शैक्षिक सत्र 2021-22 में दूसरी कक्षा में नामांकित 1.29 करोड़ बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून (आरटीई एक्ट 2009) के तहत नि:शुल्क किताबें मुहैया कराने पर शिक्षा विभाग 402 करोड़ 71 लाख 15200 रुपए डीबीटी के माध्यम से देने जा रहा है। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 16 अगस्त से स्कूल खुलने के साथ ही विभागीय अधिकारियों को एक सप्ताह में किताब क्रय की राशि बच्चों के खाते में पहुंचाने का आदेश दिया था।

शिक्षा विभाग के डीबीटी कोषांग से मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार के बाद किसी भी दिन राशि एनआईसी के सहयोग से ट्रांसफर कर दी जाएगी। इसको लेकर शेष प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। पहली कक्षा में मौजूदा सत्र में नामांकन लेने वालों को किताब की राशि शिक्षा विभाग दूसरे चरण में देगा।
राशि पहुंचाने के साथ किताबों की उपलब्धता बड़ी चुनौती
शिक्षा विभाग के लिए प्रारंभिक स्कूलों में नामांकित करीब डेढ़ करोड़ बच्चों को किताब क्रय की राशि देने के बाद बच्चों के पास किताब की उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती साबित होने वाली है। निचले स्तर तक यह व्यवस्था बनानी होगी कि हर कक्षा की सभी किताबें खरीद के लिए उपलब्ध हों और बच्चे किताब खरीदें। अभिभावक अपने बच्चों के खाते में आई राशि का कहीं और उपयोग न कर लें। शिक्षा मंत्री के आदेश पर बिहार टेक्सटबुक पब्लिसिंग कारपोरेशन लिमिटेड (बीटीबीसी) इसको लेकर सक्रिय हो गया। बीटीबीसी के एमडी मनोज कुमार ने बताया कि किताबों की उपलब्धता को लेकर सूचीबद्ध मुद्रकों के साथ एक बैठक की जा चुकी है। उनसे जिलों में उपलब्ध स्टॉक का ब्योरा तलब किया गया है। हर जगह किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर यथोचित कार्रवाई की जाएगी।

तीन साल से प्रारंभिक स्कूलों के 20 फीसदी बच्चे भी नहीं खरीद रहे किताब
वर्ष 2018 से सरकार प्रारम्भिक स्कूल के बच्चों को नि:शुल्क किताब के बदले डीबीटी से राशि दे रही है। पहले साल 13, दूसरे साल 19 तो पिछले साल महज 11 फीसदी किताब ही बच्चों द्वारा खरीदी गयी है। इन तीन साल में डीबीटी से क्रमश: 264.29 करोड़, 500.36 करोड़ 378.64 करोड़ रुपए दिए गए, इसमें से मुद्रकों द्वारा इन वर्षों में छपी 70.13, 94.20 और 52.69 करोड़ रुपए की ही किताबें बिकीं।




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