मोतीपुर, सीतामढ़ी और मोतिहारी से पकड़े गए जाली नोटों के तस्करों से पूछताछ में पुलिस को अहम जानकारी मिली है। इस गिरोह में कुल 18 तस्कर शामिल है, जिसमें नेपाल के भी तस्कर हैं। अब इस गिरोह के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए SSP जयंतकांत ने रणनीति तैयार की है। उन्होंने कहा है शीघ्र ही पूरे गिरोह को ध्वस्त कर दिया जाएगा। वैसे इस गिरोह का जो मुख्य सरगना अजय और मंजीत पकड़ा गया है। बाकी जो बचे हैं वे इन्ही के इशारे पर काम करते थे।
नेपाल जाएगी टीम
अजय के जेल जाने के बाद नकली नोट का कारोबार पूरी तरह बंद हो गया है। हालांकि, जो भी तस्कर चिन्हित हुए हैं। उन सभी को शीघ्र दबोच लिया जाएगा। बताया जा रहा है चिन्हित तस्करों को पकड़ने के लिए टीम नेपाल भी जाएगी। वहां के पुलिस अधिकारियों से सम्पर्क साधने की कवायद की जा रही है। पुलिस सूत्रों की माने तो जाली नोट के कारोबार में बॉर्डर इलाके के कुछ व्यवसाई भी शामिल हैं। जो अजय से मिले हुए थे। इन्हीं के सहयोग से वह जाली नोटों की तस्करी करता था। वह एक प्रिंटर और लैपटॉप से नोट छापता था। उक्त नोट को सकैन कर प्रिंट निकालता था।

चचेरे भाई को पकड़ने के लिए छापेमारी शुरू
अजय का चचेरा भाई नेपाल में रहता है। वह वहीं पर जाली नोट खपाने का धंधा करता है। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। सूत्रों की माने तो इनदिनों वह बार्डर के आसपास सुरक्षित ठिकाना बनाकर छुपा हुआ है। उसके घर का पता लगाकर टीम उसके परिजन पर दबिश बनाने में जुट गई है।
बैंकों में भी ग्राहकों को निशाना बनाता है यह गिरोह
पुलिस पूछताछ में पता लगा कि बैंकों में भी यह गिरोह ग्राहकों को शिकार बनाता है। छोटा नोट लेकर बड़ा नोट देने की बात बोलकर ग्राहकों से पैसा ले लेता है और उन्हें नोटों ले बंडल में सादा कागज़ थमाकर भाग निकलता है। ऐसी घटनाएं मुज़फ़्फ़रपुर के अलावा सीतामढ़ी, मोतिहारी और रक्सौल और इसके आसपास के इलाकों में बढ़ी है। ऐसे घटनाओं में भी अजय के गिरोह की संलिप्तता सामने आई है।




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