नई दिल्ली. देश में कोरोना की दूसरी ल’हर (Coronavirus Second Wave) अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुई है कि तीसरी लहर (Third Wave) की चेतावनी जारी कर दी गई है. कई राज्यों में लॉकडाउन (Lockdown) में छूट और हिल स्टेशन में तेजी से बढ़ती भीड़ को देखकर भले ही ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि अब सबकुछ सामान्य हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है. लोगों की लापरवाही से देश में तेजी से हालात बिगड़ रहे हैं. कई राज्यों में कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के प्रमुख वैज्ञानिक प्रोफेसर समीरन पांडा ने आशंका व्यक्त की है कि भारत में कोविड-19 (COVID-19) की तीसरी लहर अगस्त के अंत तक आएगी. उन्होंने अनुमान लगाया है कि उस वक्त हर दिन लगभग 1 लाख मामले सामने आया करेंगे.

तीसरी लहर की चेतावनी देते हुए इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के डिवीजन ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिकेबल डिजीज के प्रमुख डॉक्टर समीरन पांडा ने कहा, अगर वायरस आगे नहीं बदलता है तो ये पहली लहर के सामान ही होगा, लेकिन अगर वायरस ने अपना रूप बदला तो स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो सकती है. कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी के बीच उन्होंने कहा कि आने वाली लहर दूसरी लहर की तरह विनाशकारी नहीं होगी. प्रोफेसर पांडा का मानना है कि कम टीकाकरण दर और लॉकडाउन में छूट के कारण कोरोना केस में तेजी से वृद्धि हो सकती है.

कोरोना की तीसरी लहर के खतरे को भांपने के लिए इंपीरियल कॉलेज लंदन और आईसीएमआर ने गणितीय मॉडल का सहारा लिया है. प्रोफेसर पांडा ने कहा, मौजूदा स्थिति को देखते हुए हम कह सकते हैं कि तीसरी लहर आ चुकी है. उन्होंने कहा कि अगर तीसरी लहर को रोकना है तो लोगों को अभी से शादी समारोह और पार्टी में जाने से बचना होगा और मास्क का प्रयोग करना ही होगा.

वैक्सीन से कोरोना संक्रमण की दर को कम किया जा सकता है
प्रोफेसर पांडा ने माना कि भारत को एक रणनीतिक टीकाकरण अभियान की जरूरत है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस दौरान जितना कम हो सके यात्रा करनी चाहिए. पांडा के मुताबिक वैक्सीन लगवाने से संक्रमण की दर को कम किया जा सकता है और तीसरी लहर का खतरा भी कम हो सकता है.



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