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स्मार्ट सिटी के दौड़ में पटना फिर से साबित हुआ फिसड्डी, योजनाओं को सतह पर नहीं उतारने की वजह से रैकिंग में 26 अंकों का गिरावट

पटना को स्मार्ट सिटी बनाए जाने की दिशा में नगर निगम और एजेंसियों के द्वारा कागजों पर लगातार दावे किए जाते रहे हैं. लेकिन केंद्रीय मंत्रालय की ओर से जारी लिस्ट में एक बार फिर से पटना स्मार्ट सिटी की तैयारियां फिसड्डी साबित हो गई हैं. कुछ ही दिनों में 26 अंकों की गिरावट के साथ राजधानी को 61 वां रैंक मिला है. हाल ही में जारी स्मार्ट सिटी की रैकिंग सूची में राज्य के चार शहरों में पटना, बिहारशरीफ, भागलपुर और मुजफ्फरपुर को शामिल किया गया.

पिछली बार यह रैकिंग 35 और इससे पहले 29 वें पायदान पर थी. बताया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी के लिस्ट में राजधानी को शामिल करने के बाद उम्मीद के मुताबिक कार्य नहीं हो पाया. योजनाओं की तो घोषणा कर दी गई, लेकिन इन्हें जमीनी स्तर पर अमली जामा नहीं पहनाया गया. मंत्रालय की ओर से पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड को 100 में केवल 32.57 अंक मिले हैं. पांच अप्रैल को जारी रैकिंग में भागलपुर को 53 वां, बिहार शरीफ को 54 वां, मुजफ्फरपुर को 81 वां स्थान मिला था. हाल में जारी स्मार्ट सिटी की सूची में बिहार शरीफ को 70 वें, भागलपुर को 91 वें, मुजफ्फरपुर को 99 वां एवं पटना को 61 वां स्थान प्राप्त हुआ है.  इससे पहले महापौर सीता साहू भी स्मार्ट सिटी की योजनाओं को लागू करने में कछुए की चाल पर अपनी नाराजगी की थीं. उन्होंने कहा था कि योजनाओं का काम सही ढंग से नहीं किए जाने की वजह से पटना स्मार्ट सिटी के रैकिंग में लगातार गिरावट दर्ज किया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि पटना स्मार्ट सिटी को हाल के सालों में तकरीबन 380 करोड़ रुपए मिले लेकिन इनमें से केवल 131 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं. 

योजनाओं में गांधी मैदान में मेगा स्क्रीन प्रोजेक्ट, वीरचंद पटेल पथ का पुनर्विकास आदि शामिल हैं. इनके अलावा लगभग सभी योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं. राजधानी में अदालतगंज तालाब पुनर्विकास, इंटरमीडिएट पब्लिक ट्रांसपोर्ट स्टैंड का निर्माण, इंटेलिजेंट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना आदि का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है.

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