जिले के भगवानपुर प्रखंड की प्रवरा पहाड़ी पर मां मुंडेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर (Famous Temple of Goddess Mundeshwari) है। इस शक्तिपीठ की ख्याति देश से लेकर विदेश तक है। वर्ष भर यहां दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि माता अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। यहां का मनोरम दृश्य लोगों का मन मोह लेता है। यही कारण है कि एक बार यहां जो आ जाता है वह बार-बार आने का प्रयास करता है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित मां का मंदिर अष्टकोणीय (Octagonal) है। कहा जाता है कि इस स्वरूप का मंदिर देश में कहीं अन्य नहीं है। इस मंदिर की सुंदरता और भव्यता शब्दों से परे है। यह यहां की शक्ति का एक अद्भुत उदाहरण है। यहां शिलालेख और खंडित मूर्तियों में भी भव्यता दिखती है। मान्यता है कि लोक कल्याण के लिए मां भगवती ने मुंड नामक राक्षस का वध यहां किया था। तब से यह स्थान मां मुंडेश्वरी के नाम से जाना जाने लगा।


(ऐतिहासिक माता मुंडेश्वरी मंदिर। )
मंदिर को देखते ही होता है दिव्यता का अहसास
बताया जाता है कि मां मुंडेश्वरी मंदिर का पता तब चला जब कुछ गड़ेरिये पहाड़ी पर अपने पशुओं को चराने ले गए। उसी समय मंदिर पर उनकी नजर पड़ी। इसके बाद धीरे-धीरे लोग इस मंदिर के बारे में जानने लगे। हालांकि आरंभ में आसपास रहने वाले लोग ही मंदिर में आकर पूजा करते थे। जब माता की महिमा की ख्याति फैली तो फिर राज्य और देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भक्त आने लगे। यहां से प्राप्त शिलालेख में वर्णित तथ्यों से पता चलता है कि यह आरंभ में वैष्णव मंदिर रहा होगा, जो बाद में शैव मंदिर हो गया। उत्तर मध्य युग में शाक्त विचार धारा के प्रभाव से शक्तिपीठ के रूप में परिणत हो गया।

(मंदिर में लगा श्रद्धालुओं का तांता। फाइल फोटो)
दो हजार वर्ष पूर्व से हो रही पूजा
मां मुंडेश्वरी मंदिर में लगभग दो वर्ष पूर्व से पूजा-अर्चना हो रही है। मंदिर की प्राचीनता का अहसास यहां मिले महाराजा दुतगामनी की मुद्रा से भी होता है। बौद्ध साहित्य के अनुसार वह राजा अनुराधापुर वंश का था। ईसा पूर्व 101-77 में श्रीलंका का शासक रहा था।मंदिर परिसर में मिले शिलालेखों से इसकी ऐतिहासिकता प्रमाणित होती है। 1838 से 1904 ई. के बीच कई ब्रिटिश विद्वान व पर्यटक यहां आए थे। प्रसिद्ध इतिहासकार फ्रांसिस बुकानन भी यहां आए थे। मंदिर का एक शिलालेख कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में है। पुरातत्वविदों के अनुसार यह शिलालेख 349 ई. से 636 ई. के बीच का है। इस मंदिर का उल्लेख अलेक्जेंडर कनिंघम ने भी अपनी पुस्तक में किया है। उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कैमूर में मां मुंडेश्वरी पहाड़ी है, जहां मंदिर ध्वस्त रूप में विद्यमान है।
मां स्वीकार करती हैं रक्तविहीन बलि
मां मुंडेश्वरी मंदिर की शक्ति का एहसास रक्त विहीन बलि से ही हो जाता है। शक्तिपीठ होने के बावजूद यहां एक बूंंद रक्त नहीं गिरता। इस मंदिर में मां मुंडेश्वरी की प्रतिमा के सामने जो बलि दी जाती है उसमें एक बूंद रक्त नहीं गिरता। सिर्फ अक्षत व मंत्र से बलि पूरी हो जाती है। इस मंदिर की यह शक्ति देख हर कोई मां की महिमा का बखान करता है। इसके अलावा मां मुंडेश्वरी मंदिर के गर्भगृह में स्थित पंचमुखी शिवलिंग की महिमा भी अपरंपार है। इस शिवलिंग की यह खासियत है कि यदि एकाग्रचित होकर कोई श्रद्धालु देखे तो यह सुबह दोपहर और शाम अलग-अलग रंगों में दिखेगा। मंदिर का अष्टाकार गर्भगृह इसके निर्माण से अब तक कायम है। मंदिर के बाद दक्षिण में नदी है।

(माता का दर्शन करने के लिए लगी कतार। फाइल फोटो)
ऑनलाइन मंगाइए माता के दरबार का तांडुल
इस दिर में साल में तीन बार मेला लगता है। साल में माघ माह के अलावा चैत व शारदीय नवरात्र में यहां लगने वाले मेला में बिहार सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में तांडुल (चावल) का प्रसाद चढ़ाया जाता है। लोग तांडुल प्रसाद अपने घर बैठे ऑनलाइन भी चढ़ा सकते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने करीब सात-आठ वर्ष पूर्व इसकी शुरुआत की थी।
ऐसे पहुंचें माता मुंडेश्वरी के दरबार
मां मुंडेश्वरी मंदिर तक आने-जाने के लिए रास्ता सुगम है। रेल व सड़क मार्ग दोनों से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग के लिए पटना या यूपी के मुगलसराय दोनों तरफ से कोई आ सकता है। पटना से आरा या भाया गया होते हुए भभुआ रोड रेलवे स्टेशन पर उतरना होगा। वहीं यूपी के मुगलसराय से ट्रेन के माध्यम से चंदौली, कर्मनाशा, दुर्गावती के बाद भभुआ रोड रेलवे स्टेशन आना होगा। वहां से जिला मुख्यालय भभुआ के लिए वाहन पकड़ना होगा। वाहन से भभुआ आने के बाद मां मुंडेश्वरी मंदिर जाने के लिए हर समय वाहन है। भभुआ से मुंडेश्वरी धाम तक जाने के लिए दो रास्ते हैं। एक भभुआ-भगवानपुर होते हुए तो दूसरा भभुआ-चैनपुर पथ में मोकरी गेट से दक्षिण तरफ जाने वाला रास्ता सीधा मंदिर जाता है। मुंडेश्वरी मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ी और रास्ता दोनों की सुविधा है। सड़क मार्ग से भी पटना, आरा, होते हुए भभुआ आने पर मुंडेश्वरी के लिए जाना पड़ेगा।

धाम में हो रहे कई विकास के कार्य
मां मुंडेश्वरी धाम परिसर में विकास के कई कार्य हो रहे हैं। यहां अतिक्रमण को हटा कर परिसर में पूरी तरह साफ कर दिया गया है। यहां सुंदरीकरण के लिए वन विभाग द्वारा इको पार्क का निर्माण की कवायद शुरू की गई है। लेकिन लाॅकडाउन के चलते कार्य इन दिनों बंद है। लेकिन रोपवे निर्माण को लेकर तेजी से कार्य चल रहा है। दिल्ली की आई टीम रोपवे निर्माण को लेकर मिट्टी की जांच कर गई है। इसके अलावा मौसम तथा हवा की जांच को लेकर चार मशीनें विभिन्न स्थानों पर लगाई हैं। भविष्य में श्रद्धालुओं को मां का दर्शन करने के लिए रोपवे का लाभ मिलेगा।



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