BIHARBreaking NewsSTATE

बिहार में 430 दिनों से स्कूल लॉक, कब खुलेगा? शिक्षा मंत्री बोले- फिलहाल हम इस बारे में नहीं सोच रहे हैं, स्वास्थ्य विभाग और क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की रिपोर्ट के बाद ही विचार होगा

कोरोना के थर्ड वेब की आशंका जोरों पर है। माना जा रहा है कि अब सबसे ज्यादा खतरा बच्चों पर ही है। इधर साल भर से ज्यादा समय बीत गया और पढ़ाई ठप है, क्योंकि बिहार में स्कूलों को बंद हुए 430 दिन हो गए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ ही अब पैरेंट्स उनकी पढ़ाई की चिंता भी कर रहे हैं। बच्चों के लिए वैक्सीन भी अभी दूर ही नजर आ रही है। ट्रायल अभी शुरू भी नहीं हुआ। ऐसे में भास्कर ने पैरेंट्स की चिंताओं और उनके सवालों के साथ सीधे शिक्षा मंत्री से बात की। जो जवाब मिला, उसके मायने यह हैं कि सरकार फिलहाल इस बारे में कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं है। शिक्षा विभाग फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के निर्णय का ही इंतजार करेगा।

आगे पढ़िए, भास्कर के 5 सवाल और शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी के जवाब;

सवाल: स्कूल खोलने को लेकर आपका विभाग किस तरह की तैयारी कर रहा है?
जवाब: अभी तो बिहार में लॉकडाउन है। हम तो संक्रमित होने की आशंका होने पर स्कूल बंद ही कर सकते हैं। सभी जानते हैं कि बच्चों की वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। कोरोना से बचाव का अंतिम निदान तो अभी वैक्सीन ही है।

सवाल: बच्चों का टीकाकरण हो जाए तभी स्कूल खुले, ऐसा ही सोच रहे हैं क्या?
जवाब: कल क्या होगा, कहना मुश्किल है। जो परिस्थितियां आ रही हैं और जो आने वाली हैं, उसको लेकर सरकार फैसला ले रही है। क्राइसिस मैनेजमेंट कमिटी से विमर्श के बाद सरकार तय करेगी कि लॉकडाउन बढ़ाना है या नहीं। उसी हिसाब से स्कूलों का खुलना भी तय होगा।

सवाल: आपका विभाग थर्ड वेब की तैयारी किस तरह कर रहा है?
जवाब: थर्ड वेब से निबटने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। स्कूल किस तरह और कब खुलेंगे, यह स्वास्थ्य विभाग की सलाह पर भी निर्भर करेगा।

सवाल: CBSE की की 12वीं की परीक्षाएं कराने पर आपने सहमति दी है?
जवाब: परीक्षाएं जरूर होनी चाहिए, लेकिन लॉकडाउन की स्थिति में इसे तत्काल आयोजित करना संभव नहीं होगा। कुछ दिनों बाद संभावित डेट घोषित कर देना चाहिए। हमने ऑनलाइन परीक्षा का सुझाव भी दिया था।

सवाल: बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कत आ रही है?
जवाब: बिहार सरकार ऐप के जरिए बच्चों को घर पर ही पढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि ज्यादातर बच्चों के पास इससे जुड़ी टेक्निकल सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसलिए दिक्कत हो रही है। हमने केंद्र सरकार को इस बात की जानकारी दी है और मांग की है कि बच्चों को इसकी सुविधाएं उपलब्ध कराएं।

अब जानिए, शिक्षक संघ इस मामले में क्या चाहता है

बिहार के अलग-अलग शिक्षक संगठनों ने भी कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। जब तक उनके लिए पढ़ाई का सुरक्षित माहौल न बन जाए, तब तक स्कूल न ही खोले जाएं तो बेहतर है। पटना के बापू स्मारक गर्ल्स हाई स्कूल में कार्यरत शिक्षक व राज्य स्तर के एथलेटिक कोच अभिषेक कुमार कहते हैं कि हमलोग भी बच्चों के शैक्षणिक गार्जियन हैं, और नहीं चाहते कि उनके लिए कोई खतरा हो। जब तक स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन समूह यह निर्णय न कर ले कि बच्चों का स्कूल जाना सुरक्षित है, तब तक तो स्कूल नहीं ही खोले जाने चाहिए। स्कूल जब भी खुलें, हम शिक्षक जरूर पूरा प्रयास करेंगे कि उनकी पढ़ाई जो छूटी है, उसे पूरा कर दें।

नियोजित शिक्षक संघ के अश्विनी पांडेय भी कहते हैं कि बच्चों के लिए स्कूल तभी खोले जाएं, जब उनकी पढ़ाई का माहौल सुरक्षित हो। उनके लिए वैक्सीन बनने में तो अभी देर है, इसलिए कम से कम सभी शिक्षकों और पैरेंट्स का वैक्सीनेशन तो जरूर ही करा दिया जाए। इसके बाद ही स्कूल खोलने का फैसला हो।

प्राइवेट स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई के पक्ष में, चाहते हैं सरकार पैरेंट्स से भी पूछे

बिहार में प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट श्मायल अहमद कहते हैं कि थर्ड वेव की स्थिति में स्कूल हरगिज नहीं खोले जाने चाहिए और ऑनलाइन ही पढ़ाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि बच्चों को टैब उपलब्ध कराए, ताकि वे पढ़ाई कर सकें। कहा कि यह अजीब स्थिति है कि सब कुछ सरकार तय कर रही है। बच्चों से और अभिभावकों की राय लेनी चाहिए कि वे क्या चाहते हैं? अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में हैं कि नहीं, या वे अभी परीक्षा को लेकर क्या राय रखते हैं? उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के समय सरकार सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को वेतन देती है, लेकिन प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों के बारे में कुछ नहीं सोचती। बिहार में 5 हजार नर्सरी लेवल के प्राइवेट स्कूल बंद हो चुके हैं।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.