जिले के औराई प्रखंड के महेसवारा पंचायत में सालों पहले बनाए गए प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र इन दिनों तबेले में तब्दील है. हालत ऐसे बदतर हो चुके है कि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मरीजों की इलाज के बजाय मवेशियों का आशियाना बना दिया गया है. तस्वीरें खुद ब खुद बयां कर रही हैं कि पंचायत में मरीजों की इलाज के मंशा से बनाए गए स्वास्थ्य केंद्र को किस बदहाली की आग में झोंक दिया गया है. देखरेख के अभाव में स्वास्थ्य केंद्र जहां जर्जर हा चुका है वहीं कुछ लोग इसका उपयोग मवेशियों का चारा रख रखाव आदि के रूप में कर रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों की अनदेखी की वजह से पंचायत से जुड़े सैकड़ों लोगों को अपने इलाज के लिए दूर दराज के स्वास्थ्य केंद्रों का चक्कर काटना पड़ जा रहा है. जबकि इस निर्माण महेसवारा पंचायत से जुड़े लोगों को त्वरित प्राथमिक इलाज सहूलियत के रूप में किया गया था. पंचायत के नागरिकों ने यह भी कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है. लेकिन इसका सही लाभ ग्राम पंचायतों को नसीब नहीं हो पा रहा है.
उन्होंने बताया कि करीब दो दशक पूर्व बनाया गया यह अस्पताल अब गौशाला के रूप में बदल चुका है. कई स्वास्थ्य केंद्रों में तो वर्षों से ताला जड़ा हुआ है. ऐसे में इलाके के लोग कोरोना माहामारी से कैसे निपटेंगे? प्रश्न चिन्ह लग गया है. कहा कि कुछ दिन पहले डॉक्टरों के और एएनएम के लिए दिन की ड्यूटी लगाई गई थी. लेकिन इन स्वास्थ्य कर्मियों ने स्वास्थ्य केंद्र पर एक दिन भी अपना चेहरा नहीं दिखाया.

Input : Live cities



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