एक तरफ कोरोना तो दूसरी ओर हादसों से तबाही के मुहाने पर राजधानी खड़ा है. यह हादसा नगर निगम और नगर विकास और आवास विभाग की नाकामी, अनदेखी की वजह से होंगे. दरअसल, गुरुवार को चंद घंटे की बारिश ने राजधानी के मोहल्लों और गलियों को लबालब कर दिया. सवाल खड़ा हो गया है कि कुछ साल पहले वाली तीन दिनों में होने वाली मूसलधार बारिश का सामना करना पड़ गया तो फिर क्या शहरवासियों के लिए वही तबाही फिर से झेलनी पड़ जाएगी? कहने को तो नगर निगम और नगर विकास एवं आवास विभाग जल जमाव से शहर को मुक्त दिलाने के लिए हर साल करोड़ों खर्च कर रहा है.
फिर, राजधानी से स्थायी रूप से जल निकासी का रास्ता क्यों नहीं बन पा रहा है. अभी नगर निगम के जन प्रतिनिधि, अफसरों के द्वारा इस बार मानसून सत्र पहले ही जल निकासी की सारी तैयारियों को पूरा कर लेने के दावे किए ही जा रहे थे कि गुरुवार की बारिश ने वायदों को बेआबरू चौराहे पर खड़ा कर दिया. नगर निगम की ओर से पहले 15 मई, फिर 25 मई और पार्षदों की विशेष मांग पर 31 मई तक नाला, नालियों की सफाई का समय मांगा गया था. नगर विकास और आवास विभाग के प्रधान सचिव ने हाल के बयान में एक सप्ताह के भीतर नालों की सफाई के लिए कहा है. इस बयान के अगले दिन ही जमकर हुई बारिश से शहर के मोहल्ले, गलियों में जल निकासी का संकट खड़ा हो गया.

लोगों को बारिश की पानी के साथ नाला से सड़कों पर फैल चुकी गंदगी के बीच से होकर यात्रा पूरी करनी पड़ी. विकट समस्या वहां खड़ा हुआ है जहां नाला सफाई के नाम पर मेन होल के ढक्कन महीनों से खोल कर छोड़ दिए गए हैं. बरसात के पानी में ढक चुके इन खुले मेन होल गटर में अगर कोई पैदल राहगीर या फिर वाहन स्वामी गिरता है, उसकी जान बचाना मुश्किल होगा.




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