कोरोना महामारी के खौफ के बीच वैज्ञानिकों ने सरकार को चेताया है. उन्होंने कहा है कि यदि वैक्सीनेशन की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई, तो 6 से 8 महीनों के भीतर ही देश को कोरोना वायरस की तीसरी लहर का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही उन्होंने महामारी की रोकथाम को लेकर बताए गए नियमों का पालन किए जाने पर भी जोर दिया है. बता दें कि देश में इस समय कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है. भले ही संक्रमण के मामलों में कमी आई है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है.
वायरस को लेकर अनुमान जताने के लिए गणित का इस्तेमाल करने वाले फॉर्म्युला मॉडल से जुड़े वैज्ञानिक एम विद्यासागर ने बुधवार को कहा कि यदि देश में टीकाकरण अभियान तेज नहीं किया गया और कोविड-19 से निपटने के लिए आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया गया, तो आगामी 6 से 8 महीने में कोविड की तीसरी लहर आने की आशंका है. विद्यासागर ने इसके साथ ही कहा कि सूत्र मॉडल में किसी तीसरी लहर की संभावना नहीं जताई गई है और इस पर काम किया जा रहा है.
एक्सपर्ट का कहना है कि तीसरी लहर में बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. पहले से ही कई एशियाई देश कोरोना की तीसरी लहर से जूझ रहे हैं. कुछ पश्चिमी देशों में चौथी लहर की बात भी सामने आई है. ऐसे में भारत ज्यादा दिनों तीसरी लहर से बचा नहीं रह सकता. बता दें कि पहली वेव के दौरान कोरोना ने मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित किया था जबकि दूसरी लहर में युवा सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं. ऐसे में तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है.





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