अगर आप कभी कोरोना की जांच कराने नहीं गए हैं और आपके मोबाइल पर जांच रिपोर्ट आती है तो चौंकिएगा नहीं। बिहार में अब यह बात आम हो गई है। कई लोगों के मोबाइल पर कोरोना की रिपोर्ट आ रही है जिसे लेकर वह परेशान हो जा रहे हैं। वह अस्पताल से लेकर सिविल सर्जन कार्यालय तक दौड़ रहे हैं लेकिन यह पता नहीं चल पा रहा है कि रिपोर्ट कहां से किसकी आ गई है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में कई ऐसे मामले आए हैं, जो अब आपके सामने हैं।
जांच नहीं कराई रिपोर्ट देख हैरान
पटना के शास्त्री नगर के रहने वाले कृष्णनंदन मोबाइल पर आए कोरोना की रिपोर्ट को लेकर हैरान हैं। उनका कहना है कि जो रिपोर्ट आई है उसमें लिखा है कि दिनांक 7 मई को आपका कोरोना वायरस की जांच के लिए सैंपल लिया गया था। एंटीजन जांच में वह निगेटिव पाया गया है। कृष्णनंदन का कहना है कि वह 7 मई को कोई नमूना ही नहीं दिए हैं। कोई लक्षण भी नहीं था जिससे वह कोरोना की जांच कराएं। जांच रिपोर्ट कहां से आ गई समझ में नहीं आ रहा है। वह सोमवार को पटना की सिचिल सर्जन के पास भी जांच रिपोर्ट लेकर पहुंचे लेकिन वह भी कुछ नहीं बता पाईं। सिविल सर्जन यह कहकर मामले को टाल गईं कि मामला पोर्टल का है और इसमें उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जांच रिपोर्ट देख उड़ा प्रकाश का होश
पटना के रहने वाले प्रकाश कुमार का भी होश उड़ गया। वह जांच रिपोर्ट देख हैरान हो गए। मोबाइल पर जाे जांच रिपोर्ट आई है उसमें भी लिखा है कि 7 मई को कोरोना जांच के लिए आपका सैंपल लिया गया था। एंटीजन जांच में आपकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। कहा गया है कि मास्क पहने और सामाजिक दूरी का पालन करे। किसी भी सहायता के लिए 104 पर डायल करें। मोबाइन पर आए मैसेज में उन्हें OTP का नंबर भी दिया गया है। प्रकाश का कहना है कि 7 मई को वह कोई सैंपल नहीं देने गए थे क्योंकि उन्हें कोई परेशानी ही नहीं हुई थी। वह घर में हैं सोशल डिस्टेंस का पालन कर रहे हैं, क्यों जांच कराने जाएंगे।
श्याम के पास भी आई फर्जी रिपोर्ट
पटना के RPS के पास रहने वाले श्याम पटना के मोबाइल में भी फर्जी रिपोर्ट आई है। मैसेज में कहा गया है कि आप 7 मई को कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया गया था, जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई है। मैसेज में मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंस का पालन करने को कहा गया है। श्याम का कहना है कि वह रिपोर्ट से हैरान हैं क्योंकि 7 मई को उन्होंने जांच के लिए कहीं कोई नमूना ही नहीं दिया था। अब सवाल यह है कि यह किसकी रिपोर्ट है जो उनके मोबाइल पर भेजी गई है। वह सरकार की कोरोना जांच और इस सिस्टम से दंग हैं।
21 अप्रैल के रिपोर्ट का आज तक इंतजार
जो जांच नहीं कराने गाया उसके मोबाइल पर फर्जी रिपोर्ट आ रही है और जिसे समस्या थी कोविड का लक्षण था उसकी रिपोर्ट ही नहीं आ रही है। ऐसे लोगों की संख्या राज्य में कम नहीं है। इसी में से एक हैं देवदत्त गौतम जिन्होंने 21 अप्रैल को कोरोना की जांच कराई थी लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। काफी प्रयास के बाद मोबाइल पर मैसेज आया कि बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना जांच के लिए नमूना लिया गया था, जांच का परिणाम आने तक परिवार के अन्य सदस्यों से अलग हो कर रहें। अब सवाल यह कि कब जांच रिपोर्ट आएगी और कबतक उन्हें परिवार से अलग रहना पड़ेगा। बिहार सरकार की इस व्यवस्था से देवदत्त परेशान हैं।
आंकड़ेबाजी के खेल में सिस्टम फेल
जांच में आंकड़ेबाजी का पूरा खेल चल रहा है। ऐसा पहला मामला नहीं है पूर्व में भी ऐसे कई मामले आ चुके हैं जो सिस्टम पर सवाल खड़ा करने वाले हैं। PMCH से ही एक मामला आया था जिसमें एक बच्ची की रिपोर्ट ऐसी थमा दी गई थी जिसमें न पॉजिटिव था न निगेटिव। डॉक्टर भी इस रिपोर्ट देख हैरान हो गए थे। ऐसे ही PMCH और NMCH में एक ही दिन कराई गई एक व्यक्ति की रिपोर्ट अलग अलग आई। मोबाइल पर भी आने वाले रिपोर्ट भी ऐसे बिना सैंपल लिए हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि जांच का लक्ष्य बढ़ा दिया गया है और संसाधन और कर्मचारियों की संख्या कम होने से समस्या आ रही है।






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