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मुजफ्फरपुर: कई अस्पताल दो-दाे प्लांट से ले रहे थे ऑक्सीजन, अब एक प्लांट से ही मिलेगी

ऑक्सीजन की लगातार कमी के बाद जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ानी शुरू कर दी है। कोरोना मरीजों के इलाज के नाम पर कालाबाजारी करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई शुरू हुई है। अब अस्पतालों को जिले के दो में से किसी एक ही प्लांट से ऑक्सीजन मिलेगी। वह भी सिलेंडरों की तय संख्या के मुताबिक।

जिला प्रशासन ने इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों में दोनों प्लांट से ऑक्सीजन उठाव की जानकारी मिलने के बाद इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। ड्रग इंस्पेक्टर को संबंधित कोविड केयर हॉस्पिटल्स को तय कोटा के तहत किसी एक ही प्लांट से आपूर्ति निर्देश दिया गया है। इससे ऑक्सीजन सप्लाई की नियमित मॉनिटरिंग और ऑडिट संभव हाेगा।

आज लिक्विड ऑक्सीजन टैंक बेला प्लांट नहीं पहुंचा, तो संकट संभव

एसबीजी गैस प्लांट बेला और पाटलिपुत्र गैस प्लांट दामोदरपुर से भी रविवार को ऑक्सीजन की आपूर्ति सामान्य रही। लेकिन, बेला ऑक्सीजन प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन टैंक नहीं पहुंचा तो सोमवार को उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वैसे ड्रग इंस्पेक्टर ने कहा कि टैंक आ रहा है। इसलिए परेशानी नहीं होनी चाहिए। दरअसल, एक टैंक से दो से तीन दिन ही ऑक्सीजन उत्पादन होता है। ऐसे में एक टैंक से उत्पादन शुरू ही होता है कि दूसरे टैंक के आने का इंतजार शुरू हो जाता है।

बेड के आधार पर मिलेगी ऑक्सीजन आपूर्ति

जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे अस्पतालों को सप्लाई के लिए बेड के अनुपात में कोटा तय किया है। अब नई व्यवस्था में तय काेटे में ऑक्सीजन सिलेंडर अलग-अलग मिलेंगे। किसी अस्पताल को यदि एक दिन में 40 सिलेंडर की जरूरत है, तो उसे सुबह-शाम 20-20 सिलेंडर मिलेंगे। इससे प्लांट पर भी दबाव कम हाेगा।

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