लॉकडाउन में यूं तो बसों पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन बसें इसलिए नहीं चल रहीं कि उनके लिए पैसेंजर पूरे नहीं हो पा रहे। ऐसे में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य राज्यों से आनेवाले लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही। दूरगामी बसें उन्हें सादातपुर, चांदनी चौक आदि जगहों पर उतारकर चली जातीं और वे गंतव्य तक पहुंचने के लिए बैरिया से इमलीचट्टी सरकारी बस स्टैंड तक भटकते रहते हैं। सरकारी बस भी तभी खुलती है जब कम से कम इतने पैसेंजर हो जाएं कि डीजल में कम न पड़े।
ऐसे में खासकर सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण जानेवालों को चिलचिलाती धूप में भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। कोरोना को लेकर भोजन-पानी नहीं मिलने के कारण वे परिवार-बच्चे के साथ भूखे-प्यासे बैठे रहते हैं। बैरिया से इमलीचट्टी सरकारी स्टैंड पहुंचकर बैठे राजू राभा ने बताया कि वे असम से आए हैं। उन्हें चकिया जाना था। 3 घंटे में कोई बस नहीं खुली। दिल्ली से आए अब्दुल रहीम ने कहा कि यहां 1 बजे से बैठे हैं और अभी शाम के 5 बज गए। चिंता सता रही कि कहीं बस नहीं मिली तो इस कोरोना काल में रात में कहां रहेंगे। सूरत से आए एजाजुल हक को माेतिहारी जाना था। वे भी 4 घंटे से बैठे थे, मगर बस नहीं खुली। कहा- अभी तो ऑटो वगैरह भी नहीं चल रहे कि रिजर्व करके चले जाएं।
शहर में खड़ी हैं, 1300 से अधिक बसें
- 600 से अधिक बैरिया से चांदनी चौक
- 200 भगवानपुर से रामदयालु के बीच
- 200 बसें इमलीचट्टी से पेट्रोल पंप तक
- 50 जीरोमाइल और 50 अखाड़ाघाट में
- 50 कच्ची पक्की और 50 रेवा रोड में
- 100 से अधिक बसें अन्य जगहों पर
जहां खुलती थीं रोज डेढ़ हजार से अधिक बसें, वहां दो दर्जन भी नहीं खुल रहीं
आमताैर पर बैरिया बस स्टैंड से प्रतिदिन 1300 से अधिक बसें खुलती हैं। इनके अलावा रेवा राेड, कच्ची पक्की व सादातपुर समेत अन्य स्टैंड से करीब 200 बसें खुलती हैं। इमलीचट्टी सरकारी बस स्टैंड से 30 बसें कई फेरे लगाती हैं। लेकिन, वर्तमान में प्रतिदिन मुश्किल से औसतन 10 निजी व 8 सरकारी बसें ही प्रतिदिन खुल रही हैं।
50 प्रतिशत यात्री पूरे होने पर दूसरे जिलों के लिए; इमलीचट्टी से पथ परिवहन निगम की बसें खुल रही हैं। आम दिनों में 30 बसें कई फेरे लगाती हैं, अभी 8 बसें आ-जा रही हैं।
-आशीष पांडेय, क्षेत्रीय प्रबंधक





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