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दिल्ली में कोरोना सं’क्रमण के बीच बिहारी मजदूरों के सामान सड़क पर फेंक रहे मकान मालिक

देश की राजधानी दिल्ली की आबोहवा में फैले कोरोना के जहर का कहर इस कदर टू’टा कि फैक्ट्रियों पर ताला लटक गया। ठीकेदारों ने कामगारों को खुदा हाफिज कह गांव के लिए विदा कर दिया। बदहवासी के बीच वे बिहार रवाना हो गए। वहां से शिवहर आए कुछ कामगारों ने बताया कि जब कमरे में ताला लगाकर घर के लिए रवाना होने लगे तो मकान मालिक ने खाली करने का फरमान सुना दिया। कोई रहम नहीं दिखाई। सामान सहित बाहर कर दिया।

दिल्ली से तरियानी पहुंचे अवधेश राम, रामू राम, अर्जुन राम और अशर्फी राम ने बताया कि पुरानी दिल्ली स्थित कॉस्मेटिक कंपनी में काम करते थे। कोरोना के चलते फैक्ट्री बंद हुई तो ठीकेदार ने घर जाने को बोल दिया। जब तक खाने का सामान बचा था, तब तक रहे। कमाई का कोई साधन नहीं था तो घर चलने की तैयारी की। जब मकान मालिक से कहने गए कि गांव जा रहे हैं तो उसने कमरा खाली करने को कह दिया। मिन्नत की। बताया कि स्थिति सामान्य होने पर आएंगे। इतना सामान लेकर कहां जाएंगे, लेकिन कोई दया नहीं आई। सामान के साथ सड़क पर थे। अब घर कैसे आते? सारा सामान आसपास जानने वालों के यहां रखा। फिर किसी तरह ट्रेन से घर आए।

अपने शहर में काम मिल जाता तो नहीं जाते दिल्ली

नवंबर में शादी रचाकर दिल्ली गए बिगन पासवान होली पर भी घर नहीं लौटे थे। वजह मई में गौना कराना था। वह कहते हैं, अपने ही गांव या शहर में काम मिल जाता तो शहर क्यों रवाना होते? पुरानी दिल्ली में सिलाई का काम करने वाले पिपराही के नाज हसन व रहमत खान ने बताया कि ट्रेन पकडऩे स्टेशन जाते समय दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने रास्ते में रोका। वापस नहीं जाने को कहा, लेकिन बाजार-दुकान बंद थे। कमाई का जरिया नहीं था। खाते क्या? लिहाजा घर आ गए।

पिछली बार से अधिक भयावह मुंबई की तस्वीर

मुंबई सेंट्रल इलाके में आठ साल से घूम-घूमकर गमला बेचने वाले तरियानी प्रखंड के सोगरा अदलपुर निवासी आनंद कुमार साह के लिए घर लौटने की राह आसान नहीं थी। कहते हैं, रिजर्वेशन मिल नहीं रहा था। लग रहा था मुंबई में ही कोरोना का शिकार बन जाऊंगा। एक सप्ताह कमरे में कैद रहा। बड़ी मुश्किल से टिकट मिला। मुंबई में जगह-जगह वीरानगी थी। लोगों की भीड़ या तो अस्पतालों में या फिर स्टेशन पर दिखती थी। पिछली बार से अधिक भयावह तस्वीर है इस बार मुंबई की। मुंबई से पटना आने में जितना पैसा खर्च हुआ, उससे तीन गुना अधिक शिवहर आने में लगा। पटना तक ट्रेन टिकट समेत 730 रुपये खर्च हुए। जीप चालक ने दो हजार रुपये में शिवहर उतारा। 

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