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COVID-19 Lockdown: WHO की मुख्य वैज्ञानिक ने लॉकडाउन पर चेताया, कहा- इसके परिणाम भयानक हैं

नई दिल्ली. भारत (India) कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहा है. इसके चलते कई राज्यों ने वीकेंड लॉकडाउन, नाइट कर्फ्यू जैसी पांबदियां लगाई हैं, तो वहीं कई जगह पूर्ण लॉकडाउन को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है. हालांकि इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन (Dr Soumya Swaminathan) ने लॉकडाउन (Lockdown) को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि इसके परिणाम भयानक होंगे. साथ ही उन्होंने महामारी की दूसरी लहर को नियंत्रित करने में लोगों की भूमिका पर भी जोर दिया है. इस दौरान उन्होंने वैक्सीन डोज को लेकर भी चर्चा की.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक डॉक्टर स्वामीनाथन ने कहा ‘तीसरी लहर के बारे में सोचने और पर्याप्त लोगों को टीका लगाए जाने तक हमें दूसरी लहर का सामना करना होगा. इस महामारी में पक्का कई और लहरें भी हो सकती है.’ डब्ल्युएचओ ने कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज के बीच 8-12 हफ्तों का गैप रखने की सलाह दी है. इसपर स्वामीनाथन ने कहा ‘फिलहाल बच्चों को वैक्सीन लगाने की सलाह नहीं है, लेकिन हां दो डोज के बीच गैप को 8 से 12 हफ्तों तक बढ़ाया जा सकता है.’


डब्ल्युएचओ की रीजनल डायरेक्टर डॉक्टर पूनम खेत्रीपाल ने भी वैक्सीन की बात पर जोर दिया है. 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर उन्होंने कहा कि संक्रमण की नई लहर पूरे क्षेत्र में फैल रही है. वैक्सीन की रफ्तार को बढ़ाए जाने के लिए प्रयास करने होंगे. खास बात है कि भारत में हर रोज औसतन 26 लाख वैक्सीन डोज दिए जा रहे हैं. इस मामले में भारत से आगे केवल अमेरिका है. वहां औसतन 30 लाख डोज रोज दिए जा रहे हैं.

हालांकि, पुणे में एक्सपर्ट्स ने लॉकडाउन की बात पर आपत्ति उठाई है. प्रोफेसर एल एस शशिधरा ने कहा ‘बीते साल लॉकडाउन के दौरान भी पुणे में कई हॉस्पॉट थे. आंशिक रूप से ही, जैसे ही लॉकडाउन हटा, आंकड़े फिर बढ़ना शुरू हो गए. तब 10 दिनों के लॉकडाउन ने भी मदद नहीं की थी. आंकड़े लगातार बढ़ते रहे थे. लॉकडाउन के दौरान भी कम्युनिटी ट्रांसमिशन के चलते वायरस इलाके के छोटे समूहों में फैलेगा. जैसे ही लॉकडाउन हटाया जाएगा यह और तेजी से फैलेगा, क्योंकि लॉकडाउन के तनाव के बाद लोग आराम करते हैं.’ मार्च की शुरुआत से ही कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़त देखी जा रही है.

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