नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जब से बांग्लादेश (Bangladesh) के दौरे से वापस आए हैं तब से बांग्लादेश में हिंदुओं (Hindu) की बदतर स्थिति के बारे में कई खबरें सामने आ चुकी हैं. पाकिस्तान (Pakistan) की तरह ही बांग्लादेश में भी हिंदुओं के साथ भेदभाव किया जाता है. हालात ये हो चुके हैं कि बांग्लादेश के हिंदू किसी तरह अपनी जान बचाकर देश से भागना चाहते हैं. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो 25 साल बाद बांग्लादेश में एक भी हिंदू नहीं बचेगा.
सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरलिज्म एंड ह्यूमन राइट्स (सीडीपीएचआर) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति बदतर हो गई है. बता दें कि सीडीपीएचआर ने भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और तिब्बत में मानवाधिकार को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट को शिक्षाविद, वकील, जज, मीडियाकर्मी और शोधकर्ताओं के एक समूह ने तैयार किया है.
ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अब्दुल बरकत ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पिछले 4 दशक से बांग्लादेश से 2.3 लाख से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के हालात नहीं सुधरे तो 25 साल बाद वहां कोई भी हिंदू नहीं रहेगा. इस समय के हालात को देखते हुए हर कोई देश छोड़कर कहीं और जाना चाहता है.
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हालात अच्छे नहीं
सीडीपीएचआर की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी अल्पसंख्यकों के हालात अच्छे नहीं हैं. रिपोर्ट में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ सिख और ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ भी भेदभाव किया जाता है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यक को डराया और धमकाया भी जाता है. विभाजन के समय पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 3.5 करोड़ थी जो अब घटकर 50 से 60 लाख रह गई है.









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