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बिहार में कोरोना गाइडलाइन तो’ड़ने वालों पर से वापस होगा मु’कदमा, प्रस्ताव पर विधि विभाग कर रहा विचार

पटना
साल 2020 में कोरोना को पूरे देश ने झेला। आपदा अधिनियम के तहत सरकार ने कई नियम बना डाले। कई लोग जानकारी के अभाव में तो कई ने अति आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन किया। लिहाजा उनपर केस दर्ज हो गया। ऐसी तादाद हजारों में है। बिहार सरकार ऐसे लोगों को राहत देने की मूड में है।

आपदा अधिनियम में दर्ज केस वापस होंगे
बिहार सरकार कोरोना गाइडलाइन उल्लंघन मामले में दर्ज केस को वापस लेने जा रही है। बिहार विधान परिषद में सरकार की तरफ से प्रभारी मंत्री विजेंद्र यादव ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में विधि विभाग के पास प्रस्ताव भेजा है और उस पर फैसला आने के बाद लॉकडाउन और महामारी के दौर में आपदा अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

लोगों को राहत देने की तैयारी में नीतीश सरकार
दुनियाभर में साल 2020 कोरोना वायरस के नाम रहा। लोगों ने काफी परेशानियां झेली। देश में ऐसी परिस्थितियों का सामना किया, जिसकी कभी किसी ने कल्पना नहीं की होगी। करोना काल में लॉकडाउन और दूसरे गाइडलाइन तोड़ने वाले लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया। बिहार में भी ऐसे मुकदमों की तादाद काफी है। लेकिन अब नीतीश सरकार कोरोना काल में लॉकडाउन और अन्य गाइडलाइन तोड़ने वालों पर किए गए मुकदमें वापस लेने की तैयारी में है।

यूपी-उत्तराखंड में वापस हो चुका है मु’कदमा
बिहार विधान परिषद में शुक्रवार को एमएलसी आदित्य नारायण पाण्डेय की तरफ से इससे जुड़ा गैर सरकारी संकल्प लाया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कोरोना काल के दौरान आपदा अधिनियम के तहत दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए गए हैं। बिहार को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए। सरकार ने उनके सवाल के जवाब में कहा कि इस पर पहले से ही विचार किया जा रहा है। इस तरह के प्रस्ताव को विधि विभाग के पास भेजा गया है।

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