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किसानों के लिए अच्छी खबर, इस बार गेहूं के बम्पर उत्पादन के आसार, ठंड ज्यादा दिन रहने से रबी के अधिक उत्पादन की उम्मीद जगी

अगर माघ भर मौसम ने ऐसे ही साथ दे दिया तो किसानों के घर रबी फसल से भर जाएंगे। वर्षों बाद रबी में मौसम ने किसानों का जमकर साथ दिया। गेहूं के लिए जरूरी ठंड भी बरकरार रही और दूसरी फसलों को पाला भी नहीं मारा। लाही का प्रकोप भी इस साल अब तक नहीं दिखा। जनवरी में चंद दिनों के लिए पारा चढ़ा तो किसानों के होश उड़ने लगे थे, लेकिन उसकी मियाद बहुत कम दिन रही और फसल को नुकसान नहीं हो पाया। बस, एक पखवारा और मौसम ऐसे ही सहाय रहा तो बात बन जाएगी। कुल मिलाकर राज्य में इस बार गेहूं के बम्पर उत्पादन के आसार बन रहे हैं। 

धान की खेती पर तो हर साल बाढ़ और सुखाड़ का प्रभाव होता है, लेकिन हाल के वर्षों में ठंड कम पड़ने से गेहूं का उत्पादन भी बढ़ नहीं रहा है। स्थिति यह है कि काफी बढ़ने के बाद भी अब तक छह-सात साल पहले वाले उत्पादन के आंकड़े तक ही पहुंच सके हैं। इसका एकमात्र कारण है कि हर साल फरवरी में काफी गर्मी पड़ने लगती है। लेकिन जनवरी में एक सप्ताह को छोड़ दें तो इस साल दिसम्बर से ही रबी के लिए मौसम बहुत अच्छा है। रबी की सारी फसलें ठंड वाली होती हैं। गेहूं के लिए हर हाल में न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस से कम ही रहना चाहिए। अधिकतम तापमान भी 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए, वह भी बाली पकने के समय। उसके पहले तापमान हमेशा दस डिग्री सेल्सियस से नीचे होना चाहिए। इस साल अब तक यह स्थिति बनी रही।

पिछले कुछ वर्षों से ठंड की अवधि भी दो महीने से अधिक नहीं रह पा रही थी। इसका असर गेहूं उत्पादन पर पड़ा है। इसके अलावा धान की रोपनी आर्द्रा में करने के कारण गेहूं की बुआई में देर हो जाती है। रोहिणी नक्षत्र में जहां रोपनी होती है वहां मार्च तक कटनी हो जाती है। लेकिन, आर्द्रा नक्षत्र में जहां धान की रोपनी होती है, वहां कटनी अप्रैल तक जाती है। उस समय गर्मी काफी हो जाती है और दाने पुष्ट नहीं होते हैं। इस बार उम्मीद है कि प्रकृति किसानों की इस समस्या का निराकरण कर देगी।  

मौसम की मार का ही हाल है कि सात साल पहले 2012 -13 में गेहूं का उत्पादन लगभग 61.74 लाख टन था। उसके बाद के एक साल तक तो कमोबेश यह स्थिति बरकरार रही लेकिन 2014-15 में गेहूं का उत्पादन घटकर लगभग 35.60 लख टन हो गया। फिर बढ़ना शुरू हुआ और उसके अगले साल 47 लाख टन और उसके बाद 2016-17 में लगभग 60 लाख टन और 2017-18 में 61.04 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ। यानी उत्पादन गिरने के बाद संभलने लगा है। अब भी यह 65 लाख टन से आगे नहीं बढ़ा है। 

तापमान
– 08 डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए न्यूनतम तापमान  
– 20 डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए (फरवरी के बाद) 
– 04 डिग्री तक गिरने का अनुमान था इस वर्ष तापमान 
– 04 महीने ठंड के रहने की उम्मीद   
– 71 लाख टन है गेहूं उत्पादन का लक्ष्य

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