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गाय का गोबर कैसे चमकाएगा आपका घर और किसानों की किस्मत

गाय में गुणों की कमी नहीं है और अगर इसे विज्ञान पर परखा जाए तो खुद को साबित भी करेगी. मंगलवार को केंद्र सरकार ने गाय के गोबर से बना प्राकृतिक पेंट (Prakritik Paint) लॉन्च किया है. इसका मकसद किसानों की आमदनी को बढ़ाना है और गाय के गोबर से होने वाले फायदे को घर-घर की दीवारों तक पहुंचाना है. लेकिन सबसे खास है, गाय को मिल रहा वैज्ञानिक आधार. हिंदुस्तान में जिस देसी गाय को शुभ माना गया है, हिंदू घरों में जिसे माता की तरह पूजा जाता है. जिसके दूध, दही, घी लेकर गोबर तक को अनुष्ठान में शामिल किया जाता है, उसकी शक्ति को केंद्र सरकार ने पहली बार वैज्ञानिक आधार दिया है. जो वैज्ञानिक आधार अब पेंट के रूप में डिब्बों में कैद है.

खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने गाय के गोबर से पर्यावरण के लिए अनुकूल प्राकृतिक पेंट तैयार किया है और दावा किया है कि इससे गांव और शहरों के घर ही नहीं, देश के किसानों की किस्मत भी चमक जाएगी. केंद्र सरकार के एमएसएमई मंत्रालय ने दुनिया का पहली बार गाय के गोबर से बना पेंट लांच किया है. जो बाजार में मौजूद प्राकृतिक पेंट की ही तरह है, लेकिन उससे बेहतर भी है और उससे सस्ता भी.

प्राकृतिक पेंट के 8 लाभ: सरकार

आज भी जो लोग मिट्टी के घरों में रहते हैं, वो अपने घर की दीवारों पर गाय के गोबर का लेप लगाते हैं. अब उसी गाय का गोबर गंधहीन पेंट बनकर शहरों में भी घरों की रौनक बढ़ा सकते हैं. सरकार का दावा है कि इस पेंट के आठ लाभ होंगे. गाय के गोबर से बना पेंट एंटीफंगल होगा यानी फंगस नहीं लगने देगा, एंटीबैक्टीरियल होगा यानी घर की दीवारों पर बैक्टीरिया को नहीं पनपने देगा, इसमें लेड, मरकरी, कैडमियम और क्रोमियम जैसे हानिकारक भारी धातु नहीं होंगे. इसके अलावा ये इको फ्रेंडली है, प्राकृतिक है, टॉक्सिक नहीं है और इस पेंट में गाय का गोबर है.. ये कतई पता नहीं चलेगा. ये बताने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुद अपने भी घर में खादी पेंट लगवाया है.

शहर हो या गांव, ये पेंट सिर्फ चार घंटे में सूखेगा लेकिन सरकार ने इसी पेंट से देश के किसानों की किस्मत चमकाने की तैयारी की है. खादी पेंट बनाने की तकनीक फ्री में किसानों को दी जाएगी. और देश भर के किसानों को पेंट का प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा. इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से सहायता राशि भी दी जाएगी. यानी गाय के गोबर से पेंट बनाकर किसान अच्छा पैसा कमा सकता है और एक गाय का गोबर बेचकर भी 30 हजार रुपये कमा सकता है. लेकिन ऐसा सिर्फ देसी गाय के साथ ही मुमकिन है. गाय के गोबर से बने इस खादी पेंट को बीआईएस यानी भारतीय मानक ब्यूरो ने प्रमाणित किया है. इसे खादी ग्रामोद्योग की जयपुर इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है.

गाय की बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था

गाय सिर्फ शरीर को स्वस्थ बनाने वाला दूध ही नहीं देती बल्कि गाय के दूध से बनने वाले उत्पादों के अलावा गाय का गोबर और गौमूत्र भी बड़े काम के हैं. आप कह सकते हैं कि गाय नेमतों का खजाना है. ऐसे में आज गाय के महत्व को समझने के लिए हमें उसके आर्थिक पक्ष को भी समझना होगा. आप इसे गाय का अर्थशास्त्र यानी COW-NOMICS भी कह सकते हैं.

साल 2012 में किए गए लाइव स्टॉक जनगणना के मुताबिक, भारत में कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवरों की संख्या 51 करोड़ है. इनमें से 11 करोड़ गायें हैं. भारत दूध का उत्पादन करने वाला सबसे बड़ा देश है. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में दूध का उद्योग 6 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का है. इसीलिए आर्थिक नजरिए से गाय को सबसे फायदेमंद पशुओं में एक माना गया है.

गाय का दूध ही नहीं बल्कि उसका गोबर और गौमूत्र भी आर्थिक तरक्की के दरवाजे खोल सकता है. गायों से हर वर्ष 10 करोड़ टन गोबर हासिल होता है, जिसका इस्तेमाल ईंधन के तौर पर किया जाता है. इसकी कीमत 5 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है. ईंधन के तौर पर गोबर का इस्तेमाल करने से हर साल 5 करोड़ टन लकड़ी की भी बचत होती है. यही नहीं, रासायनिक खाद के मुकाबले गोबर से बनी प्राकृतिक खाद खेतों के लिए बेहतर है. इससे फसल भी अच्छी होती है.

हम यही कहेंगे की गाय का अपना एक समाजशास्त्र भी है. ऋगवेद में गाय को देवी की संज्ञा दी गई है. वैदिक शास्त्रों में किसी भी जानवर के मुकाबले गाय का जिक्र सबसे ज्यादा बार आता है. गाय से प्राप्त होने वाले दूध, घी, दही, गौमूत्र और गोबर को आयुर्वेद में पंच-गव्य कहा जाता है. जिनका इस्तेमाल पूजा-पाठ में होता है. वैज्ञानिक रिसर्च में भी ये साबित हुआ है कि गाय के दूध का सेवन करके कई रोगों का इलाज किया जा सकता है

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