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भाजपा सांसद हेमामालिनी बोलीं- किसानों को पता ही नहीं उन्हें क्या चाहिए, उनके पास कोई एजेंडा नहीं

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश स्थित मथुरा से भारतीय जनता पार्टी सांसद हेमामालिनी (Hema malini) ने विपक्ष पर किसानों को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों को किसानों व खेती के लिए बेहतर बताया. हेमामालिनी सोमवार को मथुरा के वृन्दावन स्थित अपने आवास पहुंची हैं. इससे पहले वह बीते वर्ष फरवरी माह में कुछ दिन के लिए मथुरा आई थीं. उन्होंने कहा, ‘नए कृषि कानूनों में कोई कमी नहीं है. लेकिन विपक्ष के बहकावे में आकर लोग आंदोलन कर रहे हैं.’

हेमामालिनी ने एएनआई के अनुसार कहा ‘यह अच्छा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने कानूनों पर रोक लगा दी है.  उम्मीद है कि इससे स्थिति शांत होगी. किसान इतनी सारी बातचीत के बाद भी आम सहमति के लिए तैयार नहीं हैं. वे यह भी नहीं जानते हैं कि वे क्या चाहते हैं और क्या समस्या है. इसका मतलब है कि वे ऐसा किसी के कहने पर कर रहे हैं.’

किसानों को टॉवर तोड़ते हुए देखना अच्छा नहीं लगा- हेमा
हेमामालिनी ने इस बात पर अपनी नाराजगी व्यक्त की कि कुछ प्रदर्शनकारी पंजाब में मोबाइल फोन टॉवरों पर तोड़फोड़ कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘पंजाब को बहुत नुकसान हुआ है. उन्हें (किसानों को) टॉवर तोड़ते हुए देखना अच्छा नहीं लगा. सरकार ने उन्हें बार-बार बातचीत के लिए बुलाया है, लेकिन उनके पास कोई एजेंडा नहीं है.’

प्रदर्शन कर रहे किसान लोहड़ी पर जलाएंगे नए कृषि कानूनों की प्रतियां
दूसरी ओर दिल्ली सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि वह बुधवार को लोहड़ी के मौके पर प्रदर्शनस्थलों पर नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे. किसान नेता मंजीत सिंह राय ने बताया कि सभी प्रदर्शन स्थलों पर आज शाम कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर वे लोहड़ी मनाएंगे. प्रदर्शन कर रहे 40 किसान संगठनों का शीर्ष संगठन ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ आज दिन में आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक भी करेगा.


किसान संगठनों ने कल कहा था कि वे उच्चतम न्यायालय की तरफ से गठित समिति के समक्ष पेश नहीं होंगे और आरोप लगाया कि यह ‘सरकार समर्थक’ समिति है. किसान संगठनों ने कहा कि उन्हें तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है. उन्होंने तीन कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाए जाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया. हालांकि समिति के सदस्यों की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया है.

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