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फिर एक बार जमेगा CM नीतीश का ‘जनता दरबार’, जानिए- कब लोगों से सीधे फीडबैक लेंगे मुख्यमंत्री

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) फिर से जनता दरबार शुरू करने जा रहे हैं. हालांकि वह जनता दरबार (Janata Darbar) कोरोना वायरस का असर और कम होने के बाद शुरू करेंगे, जिसमें वो जनता से सीधे-सीधे रूबरू होंगे और फरियाद सुनेंगे. यकीनन सीएम नीतीश के इस जनता दरबार में बिहार भर के लोग अपनी समस्या को लेकर पहुंच सकते हैं. जबकि इस जनता दरबार का स्वरूप क्या होगा यह जल्द ही लोगों के सामने आ जाएगा. आपको बता दें कि नीतीश कुमार जब 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्‍होंने जनता दरबार शुरू किया था. इस दौरान वह सप्ताह के प्रत्येक सोमवार को लोगों की फरियाद सुनते थे और मुख्यमंत्री खुद अधिकारियों को फोन कर फरियादियों की समस्या के निपटारे का निर्देश देते थे.

नीतीश कुमार का जनता दरबार कार्यक्रम तकरीबन दस साल चलने के बाद बिहार में लोक शिकायत निवारण कानून बन गया और जनता मुख्यमंत्री के पास आने के बदले शिकायत केंद्र पहुंचने लगी. यह कानून 5 जून 2016 को ‘बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून’ के तौर पर लागू हुआ था. इस कानून के तहत 60 दिनों के भीतर जनता की शिकायतों का निपटारा होना था. जबकि यहां आने वाली शिकायतों के निवारण के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यवस्था की गई थी, जिसमें 44 सरकारी विभागों को इसके दायरे में लाया गया था. ऐसे में यहां शिकायतें तो आनी शुरू हो गईं, लेकिन जनता की नीतीश कुमार और अधिकारियों के साथ सीध संवाद खत्म हो गया था.

फिर से जनता दरबार शुरू का क्‍या है मतलब

बिहार में हमेशा बड़े भाई की भूमिका में रहने वाली नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में छोटे भाई की भूमिका हो गई है. माना जा रहा है कि जनता दरबार बंद होने के बाद नीतीश कुमार की लोकप्रियता में कमी आ गई थी. ऐसे में जनता से सीधा संवाद करने के लिए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से लोगों से आमने सामने रूबरू होंगे और उनकी शिकायत का निपटारा ऑन द स्‍पॉट भी होगा.​ इसके साथ ही वह फिर से बड़े भाई की भूमिका के लिए जमीन तैयार कर सकेंगे.

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