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2500 स्टूडेंट्स को निशुल्क ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहा है एक सरकारी शिक्षक, आखिर कैसे, जानें…

बठिंडा । जब पूरे भारत में लॉकडाउन ने सभी को असमंजस की स्थिति में डाल दिया स्कूल एवं कॉलेज सभी बंद कर दिये गये , स्कूलों में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल से होना मुश्किल था ऐसे में केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक बठिंडा के गणित लेक्चरार संजीव कुमार ने पूरे भारत के बच्चों को फ्री ऑफ़ कॉस्ट मैथ्स पढ़ाने का निर्णय लिया । इरादा नेक था पर चुनौती बड़ी इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन क्लास सारा सिस्टम समझा घर पर सारा सिस्टम बनाया ।संजीव कुमार तैयार थे परंतु बच्चों को इस क्लास के बारे में जानकारी कैसे दें अब यह समस्या थी क्लास का शेडूल बनाकर व्हाट्सप्प ग्रुप में अपने मित्रों के साथ शेयर किया और 29 मार्च को पहले ही ट्रायल क्लास में 50 बच्चे थे हौसला बढ़ा व्हाट्सअप मैसेज आगे शेयर हुआ दूसरी क्लास में 350 बच्चों की रिक्वेस्ट थी इतने बच्चों को जोड़ने के लिए ज़ूम ऐप का बिसनेस प्लान लिया संजीव कुमार जी बच्चों को मैथ्स पढ़ा रहे थे साथ ही ख़ुद भी ऑनलाइन क्लास को बेहतर कर रहे थे कॉपी, व्हाइटबोर्ड से आगे निकलकर एप्पल ऑयपैड और लैपटॉप का प्रयोग करके पढ़ाना शुरू कर दिया । हर अध्याय के बाद गूगल फॉर्म पर टेस्ट लिया जाता है और बच्चों को उनकी ईमेल पर टेस्ट का परिणाम भेजा जाता है । संजीव कुमार आठवीं से बारहवीं और एनटीआटीसी के बच्चों को मैथ्स पढ़ा रहे हैं । 50 बच्चों से शुरू हुआ ऑनलाइन कक्षा का यह सिलसिला आज तक़रीबन 2500 तक पहुंच रहा है। बठिंडा के इलावा देश के विभिन्न शहरों के बच्चे भी इनके साथ जुड़े हैं आठ माह पहले आरम्भ हुयी कक्षा आज भी जारी है ।संजीव बताते हैं कि शुरुआत में वाट्सएप ग्रुप में रिक्वेस्ट आने पर बच्चों को शामिल किया जाता है, जिसमें उसका क्लास, स्कूल पूछा जाता है और फिर उसी के आधार पर उसे सेव किया जाता है। प्रतिदिन हरेक बच्चे को क्लास वाइज टाइम टेबल के अनुरूप व्यक्तिगत तौर पर ब्रॉडकास्ट के जरिए रजिस्टर्ड मोबाइल पर आईडी और पासवर्ड भेजा जाता है जिसे लॉगिन करके 1 घंटे की क्लास शुरू होती है। बच्चों को मानसिक तौर पर तैयार करने के लिए जाने माने शिक्षाविद अपनी सेवाएं देते है और छात्रों का मार्गदर्शन करते है ।2500 विद्यार्थी को ऑनलाइन शिक्षा दे रहे संजीव कुमार बताते है कि उनको रोज़ाना बहुत सारे लेटर ईमेल मिलती है जिसमें स्टूडेंट्स अपनी भावनाओं को बताते है । संजीव कुमार इसका श्रेय उन बच्चों व अभिभावकों को देते हैं जो उनके साथ जुड़े हैं ।

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