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वैक्सीन की बेहतर प्रबंधन व रख-रखाव के लिए हैंडलरों का प्रशिक्षण

वैक्सीन की बेहतर प्रबंधन व रख-रखाव के लिए हैंडलरों का प्रशिक्षण

  • कोल्ड चेन हैंडलरों की प्रशिक्षण शिविर मंगलवार को जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में हुआ
    शिवहर। 15 दिसंबर

कोल्ड चेन हैंडलरों का प्रशिक्षण शिविर मंगलवार को जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में हुआ। प्रशिक्षण शिविर में वैक्सीन की बेहतर प्रबंधन व रख-रखाव का प्रशिक्षण दिया गया। डीपीएम पंकज मिश्रा ने बताया कि टीके की बेहतर प्रबंधन के लिए हैंडलरों को ट्रेनिग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईविन) से सदर अस्पताल सहित पीएचसी के कोल्ड चेन प्वाइंट को जोड़ा गया है। इस सिस्टम में एप के माध्यम से वैक्सीन के तापमान एवं गुणवत्ता आदि पर नजर रखी जा रही है। जीपीएस से वैक्सीन के कोल्ड चेन मेंटेनेंस सहित अन्य जानकारियां भी आसानी से मिल रही है।

क्या है ऑनलाईन मॉनिटरिग
डीपीएम पंकज मिश्रा ने बताया कि ईविन मोबाइल एप्लिकेशन से सभी कोल्ड चेन में उपलब्ध वैक्सीन की ऑनलाइन मानिटरिग की जा रही है और गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा जा रही है। सुरक्षित भंडारण के लिए नियत तापमान की जरूरत होती है। जिसमें कमी या वृद्धि के कारण टीके के खराब होने की आशंका रहती है, लेकिन कोल्ड चेन में नियत तापमान में कमी या वृद्धि होने पर अलार्म बजने लगता है। साथ ही इसकी सूचना एप के जरिये कोल्ड चेन प्रबंधक से लेकर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एवं यूनिसेफ के जिला अधिकारी को भी प्राप्त हो जाती है।

डीप फ्रीजर में रखा जाता है टीका
कोल्ड चेन में टीके रखने के डीप फ्रीजर में थर्मामीटर लगाए हुए हैं। ऐसे में फ्रीजर के बंद या खराब होने पर इसकी जानकारी संबंधित स्टाफ के पास चली जाती है। फ्रीज का तापमान 2 से 8 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा जाने पर मोबाइल से मैसेज व अलार्म बजने लगता है। ऐसे में तुरंत स्टाफ जाकर टीके को देख लेता है और उसे खराब होने से बचा लिया जाता है।

करेंट स्टॉक की मिलती है जानकारी
कोल्ड चेन स्टाफ को टीके की मॉनिटरिग सिस्टम के लिए स्मार्ट फोन और एक जीबी का डाटा प्लान दिया गया है। वह इविन नेटवर्क की एप के जरिए टीके के स्टॉक को अपडेट करते हैं। इससे आरसीएचओ और जिला कोल्ड चेन मैनेजर को इविन वेबसाइट पर वैक्सीन की करेंट स्टॉक की जानकारी मिल जाती है। साथ ही विकसित किए गए एडवांस एप से कहां कितनी वैक्सीन है, वैक्सीन का रख-रखाव कैसा हुआ है। यह भी जीपीएस से स्वचालित तरीके से अपडेट होता है।

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