जेई से बचने के लिए जलीय पक्षी, सूअर से रहें दूर, स्वच्छता का रखें ख्याल – डॉ रविन्द्र कुमार यादव
- टीका ही जेई से बचने का सबसे बेहतर उपाय
- रुटीन इम्यूनाइजेशन में शामिल हो चुका है जेई का टीका
सीतामढ़ी। 15 दिसंबर
जेई बीमारी में बरती गई सावधानी और तुरंत ईलाज कितना जरुरी है इसका ताजा उदाहरण नानपुर प्रखंड के शरीफपुर गांव की एक बच्ची है जो हाल में ही जेई से ग्रसित होने के बाद पैर से लाचार हो गयी और हृदय में भी खराबी आ गयी। यह सरासर उसके घर वालों के लापरवाही का ही नतीजा है कि उन्होंने शुरुआत में सरकारी अस्पताल का दरवाजा नहीं खटखटाया। इस बात से हम सीख ले सकते हैं कि जेई के लक्षण बुखार, सिर दर्द, दौरे पड़ना दिखते ही हम नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर तुरंत इसका ईलाज कराएं। इस बाबत जिला वेक्टर बार्न रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार यादव कहते हैं कि जेई के 50 प्रतिशत केस में अपंगता हो ही जाती है। इससे बचने के उपाय में या तो हम सावधानी बरतें या जेई के टीके का डोज लें ।
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बहुत कम केस
डिवीबीडीसीओ डॉ रविन्द्र कुमार यादव ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बहुत कम केस सामने आए हैं। वर्ष 2019 में जेई और एईएस के संयुक्त रुप से 43 मामले सामने आए थे वहीं इस वर्ष 2020 में 11 मामलों मे जेई के कुल मरीजों की संख्या 2 है। इसका सीधा कारण लोगों के बीच आयी जागरुकता है। जागरुकता के लिए आशा ने डोर टू डोर सर्वे किए। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स का गठन किया गया। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्रों पर पोस्टर और बैनर लगाए गये।
रुटीन इम्यूनाइजेशन में शामिल है जेई
डॉ रविन्द्र ने कहा कि जेई के टीकाकरण को अब रुटीन इम्यूनाइजेशन में शामिल कर लिया गया है। जिससे एक भी बच्चा इससे छूट न पाए। वहीं इसे हर आरोग्य दिवस के सत्रों पर भी दिया जा रहा है। रुटीन टीकाकरण सत्रों पर लक्षित समूह के 30 प्रतिशत लोगों में जेई का टीकाकरण हो चुका है। वहीं लॉकडाउन के पहले कैंप व स्कूलों में 96 प्रतिशत समूहों को यह टीका दे दिया गया है।
स्वच्छता का रखें ख्याल
जेई से बचने के तरीकों के बारे में डीवीबीडीसी डॉ रविन्द्र कहते हैं कि हमें जितना संभव हो सके स्वच्छ आदतें अपनानी होगीं। वैसे जलीय पक्षी जो नदी, तालाब, पोखर या दलदल वाले क्षेत्र में रहते हों। उनसे दूरी बनायी रखना होगा। मानव बस्तियों से दूर सूअर का पालन करना चाहिए। रात को मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। शाम होते ही पूरे आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए।
प्रत्येक प्रखंड में है 2 बेड सुरक्षित
जेई व एईएस के लिए प्रत्येक प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 2 बेड सुरक्षित हैं। वहीं सदर अस्पताल में इसके लिए 10 बेड रिजर्व रखे गये हैं। इनके वार्डों में ऑक्सीजन सप्लाई, जरुरी दवाएं , एसी की व्यवस्था के साथ रोस्टर के साथ डॉक्टरों व नर्सों की तैनाती भी की गयी है। वहीं एईएस से प्रभावित चार प्रखंड रुन्नी सैदपुर, सोनबरसा, डुमरा और नानपुर में 4 एम्बुलेंसों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।







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