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कनाडा में 20 वर्ष से छठ कर रहीं बेतिया की गायत्री, पूरे विधि-विधान के साथ करतीं पूजा

लोक आस्था का महापर्व छठ सरहद की सीमाओं को पार कर चुका है। आस्था के सागर में डूबे छठ व्रती सात समंदर पार भी इसकी अलख जगा रहे है। बेतिया की गायत्री पिछले 20 वर्षों से कनाडा की राजधानी ओटावा में पूरे विधि-विधान व पवित्रता के साथ छठ करती हैं। इस अवसर पर गायत्री देवी का पूरा परिवार कनाडा में एकत्रित होता है। संतोष द्विवेदी की पत्नी गायत्री देवी मूलत: अरेराज के टिकुलिया निवासी है। संतोष द्विवेदी कनाडा में एक कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। करीब 25 वर्षों से उनका पूरा परिवार कनाडा की राजधानी ओटावा में रहता है।

 शादी के बाद से श्री द्विवेदी की पत्नी गायत्री देवी कनाडा में ही छठ करती है। पूरे परिवार को छठ का बेसब्री से इंतजार रहता है। पर्व के लिए वे अपने घर के दरवाजे पर ही घाट का निर्माण करते है। उनके विदेशी मित्र भी इसमें शामिल होते है। संतोष द्विवेदी और गायत्री देवी की पांच पुत्री और एक पुत्र है। चार पुत्रियों की शादी हो चुकी है। इसमें से तीन लड़कियां सुंदरम, मनीष, सतीष कनाडा में तथा एक लड़की छोटी जर्मनी में रहती है। जबकि एक पुत्री बबली व पुत्र प्रिंस अपने माता- पिता के साथ रहते है। छठ के अवसर पर सभी लड़कियां अपने मां-बाप के पास आ जाती है। सभी पर्व में सहयोग करते है और छठ की खुशियां साझा करते है। 

स्थानीय बाजार से पर्व की सामग्री की होती है खरीदारी 

गायत्री बताती हैं कि कनाडा में भी छठ पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। कनाडा की राजधानी ओटावा में भारतीय मूल के कई परिवार रहते हैं। इसमें बिहार और उत्तरप्रदेश के लोगों की अच्छी खासी संख्या है। ये लोग छठ पर्व मनाते हैं। पर्व के अवसर पर ओटावा के एक बाजार में पर्व में उपयोगी सारी सामग्री मिलती हैं। वहीं से छठ करने वाले बिहार और उत्तरप्रदेश के लोग पूजा में उपयोग करने वाले समान की खरीदारी करते है। 

विदेशी मित्रों की भी होती है भागीदारी 

गायत्री बताती हैं कि कनाडा में छठ करने वाले अधिकतर व्रती अपने घर के दरवाजे या छठ पर घाट का निर्माण करते है। जहां पूरे विधान से छठ व्रत किया जाता है। नहाय खाय, खरना, संध्या और सुबह का अघ्र्य दिया जाता है। कई व्रती कोसी भी भरते है। गायत्री कहना है कि इस अवसर पर भी उसके और उसके पति और बच्चों के विदेशी मित्र भी पर्व में शामिल होते है। वे भी पर्व की पवित्रता और आस्था के साथ प्रसाद ग्रहण करते है। पर्व के भक्ति गीत में विदेशी महिलाएं भी शामिल होती है।

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