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‘मनरेगा’ लागू कर अमर हो गए रघुवंश प्रसाद सिंह, जानें क्या है महत्वाकांक्षी स्कीम की इनसाइड स्टोरी?

राजनीतिक जीवन में बेबाक और बेदाग अंदाज में रहने वाले प्रखर समाजवादी नेता डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ‘मनरेगा’ योजना लागू कर अमर हो गए। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के संकटमोचक ब्रह्म बाबा उर्फ रघुवंश प्रसाद सिंह राजद का सवर्ण चेहरा थे। कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यूपीए-1) शासन काल में राजद कोटे से मंत्री बनाए गए थे।

23 मई 2004 से 2009 तक वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट में ग्रामीण विकास विभाग मंत्री रहे। इस बीच सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने रोजगार गारंटी कानून बनाने का प्रस्ताव दिया। इस कानून बनाने की जिम्मेदारी श्रम मंत्रालय को दी गई। लेकिन श्रम मंत्रालय ने इस कानून को बनाने को लेकर छह महीने में ही हाथ खड़े कर दिए। बाद में ग्रामीण विकास मंत्रालय को कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

साइन्स ग्रेजुएट और गणित में मास्टर डिग्री वाली शैक्षणिक योग्यता वाले डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने इस कानून को बनवाने और पास कराने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि कानून को लेकर उनकी कैबिनेट के ही कई मंत्री सवाल खड़े कर रहे थे। कइयों ने तो इसे फिजुलखर्ची तक करार दिया। आखिर में समाजवादी पृष्ठभूमि के रघुवंश बाबू इस योजना के लिए सभी को साथ लाने में कामयाब रहे और 2 फरवरी 2006 को एक साथ देश के 200 पिछड़े जिलों में इस कानून को लागू किया गया। 2008 तक यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) भारत के सभी जिलों में लागू की जा चुकी थी। इस कानून के तहत ग्रामीणों को 100 दिन की न्यूनतम रोजगार की गारंटी दी गई थी।

इस कानून के चलते ग्रामीणों का मजदूरी या कमाने के लिए शहरों की ओर हो रहा पलायन रुक गया था। राजनीतिक रूप से इसका फायदा यूपीए को मिला। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि यूपीए-2 को दोबारा सत्ता में लाने में इस योजना की काफी भूमिका रही। एक समय मनरेगा को यूपीए की कब्रगाह और जीता जागता स्मारक बताने वाले एनडीए सरकार ने भी इस योजना को हूबहू लागू किया।

जेपी आंदोलन से राजनीति सफर की शुरूआत
6 जून 1946 को वैशाली के शाहपुर में दिग्‍गज नेता और बिहार के वैशाली क्षेत्र के राष्‍ट्रीय जनता दल के सांसद डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का जन्‍म हुआ था। अपने स्वभाव की वजह से वे राजद के साथ साथ सभी दलों के नेताओं के साथ घुले मिले हुए थे। जेपी आंदोलन से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह 1977 में वह पहली बार विधायक बने और बाद में बिहार में कर्पूरी ठाकुर सरकार में मंत्री भी बने। वह बिहार के वैशाली लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद रह चुके हैं।

जेपी आंदोलन से बने संबंध के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और रघुवंश प्रसाद दोनों एक दूसरे के बेहद करीब भी रहे। जब 1990 में लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री बने तो रघुवंश प्रसाद सिंह को विधान पार्षद बनाया, जबकि वह विधानसभा चुनाव हार चुके थे। वहीं जब एच डी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने तो लालू प्रसाद ने उन्हें बिहार कोटे से मंत्री बनवाया। पर सही मायनों में देखा जाए तो रघुवंश प्रसाद सिंह की राष्ट्रीय राजनीति में पहचान अटल सरकार के दौरान बतौर आरजेडी नेता के रूप मिली। तब लालू प्रसाद बिहार के मधेपुरा से लोकसभा चुनाव हार गये थे। रघुवंश प्रसाद सिंह लोकसभा में पार्टी के नेता बने।

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