दिल्ली से मुजफ्फरपुर आ रही सप्तक्रांति सुपरफास्ट में शुक्रवार को अघोरिया बाजार के होम्योपैथी डॉक्टर ज्योति प्रकाश (74) की मौ₹त हो गई। ट्रेन के मुजफ्फरपुर पहुंचने पर श’व को जीआरपी ने कब्जे में लेकर एसकेएमसीएच में पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद श’व उनकी पत्नी को सौंप दिया गया। आशंका जतायी जा रही है कि हार्ट अटै’क से मौ’त हुई होगी। हाल ही में दिल्ली में उनके पुत्र की भी मौ’त हो गई थी और वे वहां से उसका सामान लेकर लौट रहे थे। पुत्र की मौ’त से वे काफी सद’मे में थे।
जीआरपी के अनुसार, कोच संख्या एस 5 में सीट नंबर 41 पर डॉक्टर सफर कर रहे थे। उनके साथ एक परिचित भी थे। परिचित ने जीआरपी को दिए बयान में कहा है कि सुबह चार बजे ट्रेन जब नरकटियागंज पहुंची तो डॉ. ज्योति प्रकाश को बैचेनी होने लगी। वे पानी पीकर लेट गए। सुबह आठ बजे चकिया के समीप उन्हें बेचैनी के साथ सीने में जलन होने लगी। उन्होंने फिर पानी पिया, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ। ट्रेन में सफर कर रहे स्कॉर्ट पार्टी को इसकी सूचना दी गई और इलाज की व्यवस्था कराने के लिए कहा गया। अगला स्टेशन मुजफ्फरपुर था, जहां इलाज के लिए डॉक्टर उपलब्ध कराए गए थे। ट्रेन जब मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंची तो डॉक्टरों ने उनकी जांच की तो उन्हें मृ’त पाया।

दिल्ली के बैंक में काम करता था पुत्र
डॉ. ज्योति प्रकाश को एक ही पुत्र था, जो दिल्ली के एक बैंक में काम करता था। कुछ दिन पहले ही उसकी मौ’त हो गई थी। बेटे का घर खाली कर उसका सामान लेकर वह लौट रहे थे। उनकी पत्नी ने जीआरपी को बताया कि बेटे की मौ’त के बाद पूरा परिवार स’दमे में था। वे भी काफी स’दमे में थे। दिल्ली से लौटते समय भी काफी दु’खी थे। तबी’यत भी कुछ महीनों से खराब चल रही थी।’
घ’टना की सूचना पाकर सुध-बुध खो बैठी पत्नी
पहले बेटे फिर पति की मौ’त से पत्नी रोते-रोते बेहाल हो गई थीं। शुक्रवार को जीआरपी ने पत्नी को घटना की सूचना दी तो वह होश खो बैठीं। जैसे-तैसे जीआरपी थाने पहुंचीं। पति का श’व देख बार-बार सुध-बुध खो देर रही थीं। वह बार-बार एक ही बाद कह रही थी, भगवान ने इस दिन के लिए उसे जिंदा क्यों रखा। जीआरपी के सिपाही व अधिकारी ढांढ़स बंधा रहे थे।



Leave a Reply