सीतामढ़ी, जेएनएन। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के अयोध्या व भगवान श्रीराम को लेकर दिए गए बयान पर सीतामढ़ी के लोगों में नाराजगी है। सभी ने इसकी तीव्र निंदा की है। नेपाली मीडिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में ओली ने कहा था कि भारत ने नकली अयोध्या बनाकर नेपाल की सांस्कृतिक विरासत का अतिक्रमण किया है। असली अयोध्या नेपाल में है। भगवान राम नेपाली हैं, न कि भारतीय।
ओली के बयान से हिंदुओं को आघात : सांसद
सांसद सुनील कुमार पिंटू ने कहा कि चीन के बहकावे में आकर नेपाली प्रधानमंत्री ने शर्मनाक बयान दिया है। उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। उनके बयान से हिंदुओं को गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने बिना इतिहास जाने-पढ़े अपनी कुर्सी बचाने के लिए विद्वेषपूर्ण बयान दिया है। भगवान राम का जन्म अयोध्या और मां सीता की प्रकाट्यस्थली सीतामढ़ी है। इसका जिक्र धर्मग्रंथों में भी है।

कुर्सी बचाने के लिए बयानबाजी कर रहे ओली
पूर्व मंत्री व विधान पार्षद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री अपनी सरकार बचाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। दुनिया जानती है कि भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ है। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला दिया कि भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ और वहां मंदिर के प्रमाण भी मिले हैं। नेपाली प्रधानमंत्री को अपना बयान वापस लेते हुए भारत से माफी मांगनी चाहिए।
रीगा से कांग्रेस विधायक अमित कुमार टुन्ना व सीतामढ़ी के राजद विधायक सुनील कुमार कुशवाहा ने भी बयान की निंदा की है।
नेपाल की एक बड़ी आबादी भारत से जुड़ी
भारत का नेपाल के साथ अलग तरह का रिश्ता रहा है। नेपाली सियासत से लेकर विदेश नीति तक में भारत का प्रभाव रहा है। नेपाल की एक बड़ी आबादी भारत में नौकरी वरोजगार से जुड़ी है। लेकिन, हाल में भारत के साथ सदियों पुरानी मित्रता को नजरअंदाज कर नेपाल कभी लिम्पियाधुरा-कालापानी-लिपुलेख पर दावा ठोकता है तो कभी बॉर्डर पर एक इंच जमीन के लिए लड़ बैठता है।



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