जिनेवा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बुधवार को चेतावनी दी है कि कोरोना (Coronavirus) संक्रमितों की बढ़ती संख्या के चलते दुनिया के ज्यादातर देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं काफी दबाव में हैं. दुनिया ऑक्सीजन कंस्नट्रेटर (ऑक्सीजन देने वाली मशीन) की कमी से जूझ रही है और इससे जल्द ही ज्यादातर देशों में ऑक्सीजन (Oxygen cylinders) की किल्लत हो जाने की आशंका बनी हुई है. WHO ने कहा है कि अमेरिका (US) में कोरोना संक्रमण (Covid-19) की वापसी हो गयी है और इसकी वजह बिना किसी पूर्व योजना के लॉकडाउन में दी गई ढील हो सकती है. ऑक्सीजन की कमी के मामले भारत, ब्राजील और अफ्रीकी देशों में ज्यादा सामने आ रहे हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस ऐडहनॉम गब्रीयसोस ने एक प्रेस वार्ता में कहा है कि ‘कई देश अब ऑक्सीजन कंस्नट्रेटर (मशीन) की कमी से जूझ रहे हैं. इस समय इस मशीन की मांग अब आपूर्ति से ज़्यादा हो गई है.’ उन्होंने कहा, ‘अब तक दुनिया में करीब 94 लाख से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 4.80 लाख लोगों की जान जा चुकी है. हर हफ़्ते दस लाख नए लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो रही है. इसकी वजह से प्रतिदिन 88 हज़ार बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर और 6.20 लाख क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है. जल्द ही ये आंकड़ा इस करोड़ से भी ज्यादा हो जाएगा.’
WHO कर रहा देशों की मदद
संक्रमण के मामलों में अचानक आई वृद्धि की वजह से ऑक्सीजन कंस्नट्रेटर की कमी पड़ गई है जिनकी कोविड 19 से जूझ रहे मरीज़ों को सांस लेने के लिए ज़रूरत होती है. ट्रेडोस ने बताया है, ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक 14 हज़ार ऑक्सीजन कंस्नट्रेटर ख़रीद लिए हैं और उन्हें आने वाले हफ़्तों में 120 देशों में भेजने की योजना है. इसके साथ ही अगले छह महीनों में 1.70 कंस्नट्रेटर, जिनकी क़ीमत 10 करोड़ डॉलर होगी, मिलने की संभावना है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की आपातकालीन टीम के प्रमुख डॉ. माइक रियान ने कहा है कि कई लातिन अमरीकी देशों में महामारी अभी भी अपना कहर ढा रही है और इस क्षेत्र में मरने वालों की संख्या एक लाख के पार चली गई है. कई देशों में पिछले हफ़्ते में 25 से 50 फ़ीसदी की बढ़त देखी गई है. माइक रियान कहते हैं कि उनके मुताबिक़, अमरीका में अब तक पीक नहीं आया है और आने वाले दिनों में भी संक्रमित होने वाले और म’रने वालों लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका है.

IMF ने भी दी चे’तावनी
उधर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) का कहना है कि कोरोना के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर के बारे में शुरू में जो अनुमान लगाया गया था, अब हालात उससे कहीं ज़्यादा ख़राब होते हुए दिख रहे हैं. आईएमएफ़ के अनुसार दुनिया भर की आर्थिक गतिविधियों में इस साल 10 फ़ीसद की कमी आएगी. अप्रैल में कहा जा रहा था कि अर्थव्यवस्था में पांच फ़ीसद की कमी हो सकती है. लेकिन जैसे-जैसे लॉकडाउन का असर पड़ रहा है, दुनिया भर की अर्थव्यवस्था उसकी शिकार हो रही हैं.
आर्थिक संवाददाता एंड्रयू वॉकर के अनुसार आमतौर पर लोग अपने ख़र्च में इज़ाफ़ा होने पर परिवार से मदद लेते हैं या फिर बचत करने लगते हैं. इसकी वजह से लोगों के ख़र्च में कमी तो आती है लेकिन वो बहुत मामूली होती है. लेकिन कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन और फिर सोशल डिस्टेंसिंग के चलते लोग अपने आप को इस वायरस से बचाने के लिए बाहर नहीं निकल रहे हैं. इस कारण लोगों की डिमांड में काफ़ी कमी आ गई है, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.



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