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राबड़ी के बिना लालू यादव ने कैसे मनाई 47वीं मैरिज एनिवर्सरी? यहां जानें RJD सुप्रीमो की सुबह की दिनचर्या…

रांची. देश और बिहार की राजनीति में अपने खास अंदाज से खास पहचान बनाने वाले लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) और बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Rabri Devi) की शादी की 47वीं वर्षगांठ (Marriage Anniversary) मंगलवार को मनाई गई. इस मौके पर सुबह की शुरुआत लालू प्रसाद ने शिव-पार्वती की विशेष आराधना से की. चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू प्रसाद लंबे समय से अदालत के आदेश पर रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती हैं. पेइंग वार्ड के पहले तल्ले पर जहां लालू प्रसाद भर्ती हैं, वहीं अपने कमरे में लालू प्रसाद ने सुबह-सुबह भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती की विशेष पूजा की और उसके बाद अपने सेवक को बताया कि उनकी शादी की सालगिरह है. इसके बाद सेवक ने RJD सुप्रीमो के निर्देश पर राजद नेताओं से कहकर मिठाई मंगवाई और रिम्स के पेइंग वार्ड की नर्स और स्टाफ का मुंह मीठा कराया.

रिम्स के जिस पेइंग वार्ड के पहले तल्ले पर लालू प्रसाद भर्ती हैं, उसी पेइंग वार्ड के तीसरे तल्ले पर कोरोना संदिग्धों का आइसोलेशन वार्ड है. बगल का ट्रामा सेंटर (जिसमें कोविड सेंटर बना हुआ है) भी जुड़ा हुआ है. इसलिए खतरे को भांपते हुए अब लालू प्रसाद अपने कमरे में ही रहते हैं. न टहलने के लिए निकलते हैं और न ही किसी से ज्यादा बात करते हैं.

अदालती परेशानियों से घिरा है परिवार

लालू प्रसाद का परिवार इन दिनों कई परेशानियों से घिरा है. चारा घोटाला मामले में स’जा का’ट रहे लालू प्रसाद की तबी’यत भी बेहद खराब है. 15 से ज्यादा बीमारियों से घिरे लालू प्रसाद अदालत के आदेश से रिम्स में भर्ती हैं, जहां वह इलाज करा रहे हैं. वहीं, बिहार की राजनीति में साल 2015 में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर जनता का विश्वास जीतने के बाद भी कुछ महीनों बाद से आरजेडी विपक्ष के रूप में सड़क पर है. राजनीतिक और अदालती परे’शानियों, खराब स्वास्थ्य के बावजूद यह लालू प्रसाद की जीवटता ही है कि वे न सिर्फ अपने वोट बैंक को एक जुट रख पाए हैं, बल्कि पार्टी नेताओं में भी ऊर्जा का संचार करते रहते हैं.

ऐसे हुई राबड़ी से शादी
लालू प्रसाद का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया में हुआ है. पढ़ाई के लिए वे गांव से पटना अपने भाई महावीर राय के पास आ गए, जो बिहार वेटनरी कॉलेज में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे. यहीं से लालू प्रसाद ने पटना विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में प्रवेश किया. बीए और फिर एलएलबी की पढ़ाई के दौरान पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष रहे. फिर जेपी के आह्वान पर लालू प्रसाद सम्पूर्ण क्रांति में शामिल हो गए. जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के परिवार में उस समय सोशल एंड इकोनॉमिकल गैप ज्यादा था. राबड़ी देवी का परिवार एक संपन्न चौधरी परिवार था, जिसके पास अच्छा जोत यानि जमीन था. वहीं, लालू प्रसाद के परिवार की स्थिति उस समय बहुत अच्छी नहीं थी. लालू प्रसाद की प्रतिभा और पढ़ाई को देखकर राबड़ी देवी के चाचा ने इस रिश्ते को फाइनल कर दिया और फिर लालू प्रसाद से राबड़ी देवी की शादी हो गयी.

जब रातों-रात राबड़ी बन गईं बिहार की सीएम
कांग्रेस से सत्ता छीनकर लालू प्रसाद बिहार की सत्ता पर काबिज हुए थे. जब चारा घोटाला में लालू प्रसाद का नाम आया और सीबीआई जांच के दौरान लालू प्रसाद को लगा कि उनकी गिरफ्तारी कभी भी संभव है, तो उस वक्त लालू प्रसाद ने एक ऐसा राजनीतिक दांव खेला, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. अपनी पत्नी राबड़ी देवी (जो उस समय तक एक गृहणी थीं) को उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया. इस तरह राबड़ी देवी बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बन गईं.
इसलिए बड़ी बेटी का नाम रखा मीसा
कांग्रेस की इमरजेंसी के खिलाफ जेपी के आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक लालू प्रसाद पर आंदोलन का प्रभाव इतना था कि जब उनकी बड़ी बेटी ने जन्म लिया, तो उसका नाम उन्होंने मीसा भारती रख दिया. उस समय MISA (Maintance of Internal Security Act) का प्रयोग कांग्रेसी शासन द्वारा विरोध की आवाज को दबाने के लिए किया जाता था.

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