मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के हरिपुर कृष्णा सकरा में ब्रह्मर्षि कौशिक वंश के इतिहास जो प्रोफेसर डॉक्टर राम एकवाल शर्मा द्वारा लिखा गया है आज उसका लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा, मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं विधायक अजीत कुमार और विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉक्टर ममता रानी, प्राचार्य,ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय मुजफ्फरपुर डॉक्टर संजय पंकज,प्रसिद्ध सम्मानित साहित्यकार,डॉ संजय कुमार विभाग अध्यक्ष,गणित विभाग,बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय,सुनील कुमार महामंत्री ब्रह्मर्षि विकास संगठन,विभेष त्रिवेदी प्रसिद्ध पत्रकार मुजफ्फरपुर, अजय कुमार चौधरी, वरिष्ठ नेता मुजफ्फरपुर डॉ भोला झा, प्रसिद्ध इतिहासकार, डॉक्टर संकेश कुमार ठाकुर एवं प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान डॉक्टर भोला ईश्वर सवाद मंडप में मंचासीन थे.


जहां डॉ राम एकवाल शर्मा ने अपनी लिखी पुस्तक कौशिक वंश का इतिहास पर प्रकाश डाला एवं उसके लेखन में आई तमाम स्थितियों के विषय में जानकारी दी. साथ ही कई स्थानों की वास्तविक दृश्य को उपस्थित करते हुए बताया कि हमने जगह-जगह जाकर के कौशिक बंसी लोगों से मिलकर के उनका रिपोर्ट उनके पूर्वजों को जानने समझने का मौका मिला. साथ ही संदर्भ में उन्होंने वाराणसी,भदोही,गाजीपुर,बलिया और बिहार के विभिन्न जिलों का भ्रमण किया. विषय प्रवेश में उनके साथ देने वाले उनके सहयोगी एवं डॉ भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के गणित विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर संजय कुमार ने उनके साथ रहे घटित कई घटनाओं का जिक्र किया और बताया इस पुस्तक के लेखन में जितने वास्तविकता को रखा गया है वह सब मेरे सामने हुआ और मैं इसमें सर के साथ हमेशा रहा और एक सहयोगी के रूप में हमसे जितना बन पड़ा उतना किया.

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए काँटी विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजीत कुमार ने कहा कि आज की तारीख में लेखन प्रथा मिट चुका है. लोग हिंदी में लिखने पढ़ने से कतराते हैं. लोग हिंदी में पी एचडी नहीं कर पा रहे हैं. बहुत कम संख्या में लोग इसमें रुचि दिखाते हैं लेकिन आज तक जितने भी शैक्षणिक संस्थान हो या जो भी बड़े-बड़े लेखक या जो भी बिहार में कभी लेखक हुए हैं उनमें ब्रह्मर्षि वंश के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है. 84 वर्ष की अवस्था में डॉक्टर राम एकवाल शर्मा जी ने जो पथ प्रदर्शन का काम किया है, इससे हमारे नौनीहालों को और हमारे लोगों को जीवन में सीख लेनी चाहिए.


आगे अध्यक्षीय भाषण में पूर्व मंत्री माननीय सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि हम लोग तो राजनीतिक जीवन में आए लेकिन समाज से भी तालुकात रखा और जगह-जगह जाकर के लोगों को प्रेरित किया. लोगों को जाना समझा और इस परिस्थिति में जो देखने को मिला कि समाज में आज इस तरह से मोबाइल या सोशल मीडिया के माध्यम होने के कारण लिखने पढ़ने की परंपरा समाप्त हो रही है, वह बड़ा दूर्भाग्यपूर्ण है. इस परिस्थिति में डॉक्टर राम एकवाल शर्मा जी ने जिस तरह की भूमिका निभाई है और अपने वंश का इतिहास लेकर के समाज के सामने में प्रस्तुत किया है वह काबिले तारीफ है और उम्मीद करते हैं कि समाज में और भी लोग आगे बढ़कर आएंगे और इस इतिहास लेखन को अपने-अपने वंश को अपने पूर्वजों को जानने समझने का अवसर देंगे. जिससे कि आने वाली पीढ़ी इसे याद रखेगी.

डॉक्टर भोला झा और डॉक्टर भोला ईश्वर ने अपने इतिहास और संस्कृत के विद्वता का परिचय देकर विश्वामित्र और कौशिक वंश की व्याख्या की और बताया कि कैसे विश्वामित्र ब्रह्म ऋषि बने और उनको वशिष्ठ का आशीर्वाद प्राप्त हुआ और उन्होंने अपने अंदर से अहंकार को दूर किया. इस संदर्भ में उन्होंने कई कहानी एवं युक्ति की चर्चा कर हमारे सामने रखने का प्रयास किया. विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉक्टर संजय पंकज ने साहित्य के द्वारा पुस्तक लेखन के संदर्भ में अपनी विशिष्ट गुणों से बहुत सारे संदर्भों का चर्चा किया और बताया या जिस तरह से लिखने पढ़ने का शौक लोगों से समाप्त हो रहा है यह पॉलिसी समाज के लिए घातक है.हमको बुजुर्ग डॉक्टर राम एकवाल शर्मा जी से सीख लेनी चाहिए उनका मार्गदर्शन लेकर के हमें आगे बढ़ना चाहिए और कुछ ना कुछ लिखते पढ़ते रहना चाहिए.

प्राचार्य डॉ ममता रानी ने मातृ शक्ति को इन सब चीजों के पीछे हाथ होने का संदर्भ व्यक्त किया और कहा कि जिस प्रकार से पुस्तक में डॉक्टर राम एकवाल शर्मा जी ने अपनी धर्मपत्नी गायत्री शर्मा जी को आगे रख करके इस पुस्तक की रचना की है निश्चित रूप से बड़े गौरव की बात है. आज हमारे समाज में जिस तरह से नारी शक्ति अछूती रही है उनको हमेशा त्याग की प्रतिमूर्ति के रूप में देखा जाने लगा है. यह चीज डॉक्टर राम एकवाल शर्मा जी ने आगे रख करके यह काम करने का प्रयास किया है जो अपने आप में गर्व का विषय है.

इसके अतिरिक्त जदयू के नेता अजय कुमार चौधरी,ब्रह्मर्षि विकास संगठन के श्री सुनील कुमार के अलावा कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किया. सभा मंडप में लगभग 300 लोग कौशिक वंश के उपस्थित थे अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ राजेश रंजन जी ने किया और मंच संचालन उपेन्द्र कुमार ने किया.



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