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जदयू के 9 मंत्री भाजपा के 14 मंत्रियों पर भारी, जानिए बिहार बजट का असली खेल

पटना: बिहार में एनडीए की सरकार में सबसे अधिक 89 विधायक भाजपा के हैं. 85 विधायक के साथ जदयू दूसरे स्थान पर है. मंगलवार को 2026-27 के लिए एनडीए ने बजट पेश किया. इसबार बजट में जनता दल यूनाइटेड की मजबूत पकड़ दिखाई दी, जबकि भारतीय जनता पार्टी बजट के मामले में पिछड़ती नजर आयी.

जेडीयू से पिछड़ जाती है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी भले ही विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी हो लेकिन जब बजट की बात आती है तो जदयू बीजेपी पर भारी पड़ जाती है. भाजपा के पास मंत्रियों की संख्या जदयू से दोगुना है. जब बजट पेश होती है तो बजट का बड़ा हिस्सा जदयू के पास चला जाता है.

बजट में जदयू अव्वल

सरकार ने कुल 3 लाख 47589 करोड़ का बजट पेश किया गया है. वर्तमान में जनता दल यूनाइटेड के आठ मंत्री हैं. आंकड़ों के मुताबिक जनता दल यूनाइटेड के खाते में बजट की सबसे अधिक राशि गई है. कुल बजट का 45.33% हिस्सा 1 लाख 57 हजार 572.34 करोड़ जदयू कोटे में गया.

भाजपा कोटे में 19.72% राशि

भारतीय जनता पार्टी के पास 14 मंत्रालय हैं. बजट के लिहाज से अगर बात कर ले तो भाजपा के कोटे में बजट का 45.33 प्रतिशत हिस्सा आया है. बीजेपी उपमुख्यमंत्री के हिस्से 88990.54 करोड़ की राशि आई है. जदयू की तुलना में 19.72% कम राशि आई है.

छोटी पार्टियों में राष्ट्रीय लोक मोर्चा आगे

छोटी पार्टियों भी मंत्रिमंडल में शामिल है. लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के दो, हम पार्टी के एक और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक मंत्री कैबिनेट में शामिल है. बजट में राष्ट्रीय लोक मोर्चा सबसे ऊपर दिख रही है. पार्टी के खाते में 10995.51 करोड़ का बजट का हिस्सा आया है. कुल मिलाकर 3.16% बजट का हिस्सा है.

सबसे पीछे हम पार्टी

इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास दूसरे स्थान पर है. पार्टी के हिस्से 2809.81 करोड़ का बजट आया है. कुल मिलाकर 0.80% बजट लोजपा रामविलास के पास है. हम पार्टी के हिस्से 1351 करोड़ आया है. हम पार्टी के खाते में 0.38 प्रतिशत का बजट है.

सरकार पर अन्य खर्चों का भारी बोझ

सरकार के ऊपर अन्य खर्चो का भी बोझ है. पेंशन मद में 35170 करोड़, शुद्ध भुगतान मध्य में 25363 करोड़ और ऋण अदायगी में 22664 करोड़ की राशि आवंटित है. अन्य खर्चों में लगभग 86240 करोड़ का बोझ सरकार के ऊपर है. बिहार सरकार कुल मिलाकर बजट का 24.18% हिस्सा पेंशन, सूद भुगतान और ऋण अदायगी पर खर्च करती है.

 

 

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