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बिहार शिक्षा विभाग का बड़ा ऐलान, महिला शिक्षकों को होगा सबसे ज्यादा फायदा

राज्य के शिक्षकों को अगले साल से उनके पदस्थापना वाले जिले में ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में शिक्षकों की हाजिरी बायोमेट्रिक माध्यम से ली जाएगी। अभी तक की व्यवस्था में शिक्षकों को राज्य मुख्यालय या अन्य जिलों में जाकर आवासीय प्रशिक्षण लेना पड़ता है।

महिला शिक्षकों को परेशानी

राज्य मुख्यालय या अन्य जिलों में जाकर प्रशिक्षण लेने के दौरान शिक्षकों को काफी परेशानियां उठानी पड़ती हैं। वहीं सबसे ज्यादा परेशानी महिला शिक्षकों को होती है। नई व्यवस्था से महिला शिक्षकों को प्रशिक्षण लेने में आसानी होगी। इसे लेकर शिक्षा विभाग की ओर से कार्य योजना तैयारी की गई है, जिसे जनवरी से लागू किया जाएगा।

स्कूल का प्रदर्शन कमजोर तो नए सिरे से प्रशिक्षण

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ.एस. सिद्धार्थ ने जिलों में ही शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करने का निर्देश सभी जिलों को दिया है। नये शैक्षणिक सत्र से शिक्षा विभाग का बड़ा फोकस सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने पर होगा। इसमें छात्रों से लेकर शिक्षकों तक के प्रदर्शन को आंकने के लिए नए-नए मानकों पर काम किया जाएगा।

हर साल दिया जाएगा शिक्षकों को प्रशिक्षण

  • सभी शिक्षकों को हर साल प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • जिन स्कूलों का प्रदर्शन लर्निंग आउटकम में कमजोर रहेगा, उन शिक्षकों को यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के जरिए दिया जाएगा।
  • शिक्षकों को प्रशिक्षण सभी नवाचारों व मानकों के आधार पर दिया जाएगा।

मॉनिटरिंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे।

इसके साथ ही प्रत्येक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में विद्या समीक्षा केंद्र के नाम से एक मॉनिटरिंग सेंटर भी स्थापित होगा। ट्रायल के तौर पर एनसीईआरटी ने इसका मॉडल भी विकसित कर लिया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उनके स्कूलों के प्रदर्शन पर भी निगाह रखी जाएगी। स्कूलों की निगरानी जिला स्तर से ही करने की तैयारी है।

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